सीमांचल की हृदयस्थली कहे जाने वाले पूर्णिया शहर का लाइन बाजार न केवल अपनी चिकित्सीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, बल्कि यह एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र भी है. लाइन बाजार स्थित प्रसिद्ध महामाया मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्री हनुमान का मंदिर पूरे जिले और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. सप्ताह के प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ हनुमान जी का विशेष दरबार सजता है, जहाँ भक्तों की भारी भीड़ दर्शन-पूजन के लिए उमड़ती है.
मंगलवार को खीर और शनिवार को खिचड़ी का महाभोग
मंदिर में वैसे तो हर दिन भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सप्ताह के दो विशेष दिनों में यहाँ का नजारा अलौकिक होता है:
- महाभोग की परंपरा: मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रत्येक मंगलवार को खीर और शनिवार को खिचड़ी का भव्य महाभोग लगाया जाता है, जिसे बाद में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. अन्य दिनों में भक्त अपनी श्रद्धानुसार लड्डू, फल और पेड़े का भोग लगाते हैं.
- सुबह से लगती हैं कतारें: इन दोनों विशेष दिनों में भोर से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी पंक्तियां लग जाती हैं. श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते हैं और संध्या आरती में भाग लेकर पुण्य के भागी बनते हैं.
छह दशक पुराना है मंदिर का ऐतिहासिक गौरव
लाइन बाजार स्थित इस पावन धाम का इतिहास लगभग छह दशक पुराना है. स्थानीय बुजुर्गों और प्रबुद्ध जनों के अनुसार:
- 1966 में हुई स्थापना: वर्ष 1966 में स्थानीय समाजसेवियों जगन्नाथ साह, राम सेवक साह, महाबीर साह, अशोक साह और स्थानीय निवासियों के सामूहिक सहयोग से यहाँ भगवान हनुमान की दिव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी.
- नित्य आरती की परंपरा: स्थापना के समय से ही यहाँ प्रतिदिन सुबह और शाम 7:00 बजे विधिवत संगीतमय आरती आयोजित की जाती है, जिसमें सैकड़ों शहरवासी और दूर-दराज से आए लोग शामिल होते हैं.
रामनवमी और हनुमान जयंती पर सजता है भव्य दरबार
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अभय कांत झा बताते हैं कि श्री रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर यहाँ विशाल धार्मिक अनुष्ठान, सुंदरकांड पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. इन त्योहारों के दौरान केवल लाइन बाजार ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया शहर से श्रद्धालु परिवार संग पहुँचते हैं और पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है.
"यह केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था का जीवंत केंद्र है. यहाँ जो भी श्रद्धालु सच्चे मन, पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा के साथ अपनी अर्जी लेकर आता है, भगवान संकटमोचन उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करते हैं. वर्षों से यह मान्यता अटूट चली आ रही है." : मुख्य पुजारी पंडित अभय कांत झा
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