खाड़ी महीनगांव घाट पर अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर, पानी में डूबा इकलौता चचरी पुल, जान जोखिम में डाल रहे राहगीर

Khari Mahingaon Ghat Chachari Pul: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड में मानसून की दस्तक से पहले ही बाढ़ जैसी विभीषिका की आहट मिलने लगी है. खाड़ी महीनगांव घाट पर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाया गया बांस का अस्थाई (चचरी) पुल जलमग्न हो गया है, जिससे दो दर्जन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कटने की कगार पर है.

पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट

Khari Mahingaon Ghat Chachari Pul: बिहार के सीमांचल इलाके में नदियों के उफान पर आने का सिलसिला शुरू हो चुका है. पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत खाड़ी महीनगांव घाट से एक बेहद चिंताजनक जमीनी तस्वीर सामने आई है. पहाड़ी और स्थानीय कछार नदियों के जलस्तर में अचानक हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी के कारण, यहाँ ग्रामीणों के आवागमन का एकमात्र सहारा माना जाने वाला बांस का चचरी पुल पूरी तरह पानी में डूब चुका है. पुल के जलमग्न होने और पानी के तेज बहाव के बावजूद, सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोग अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को विवश हैं. प्रशासन की सुस्ती के कारण स्थानीय आबादी हर पल एक बड़े हादसे के साये में जीने को मजबूर है.

किनारे की मिट्टी बनी दलदल, गाड़ियों के साथ फंस रहे लोग

नदी का पानी केवल चचरी पुल के ऊपर से ही नहीं बह रहा, बल्कि उसने अब आसपास के रास्तों को भी अपनी चपेट में ले लिया है:

  • कीचड़ और दलदल का साम्राज्य: जलस्तर बढ़ने और पानी के फैलाव के कारण नदी के दोनों किनारों की मिट्टी पूरी तरह से दलदल और गहरे कीचड़ में तब्दील हो गई है.
  • दोपहिया वाहन चालक बेहाल: इस घाट पर सबसे ज्यादा फजीहत और परेशानी मोटरसाइकिल व साइकिल सवारों को उठानी पड़ रही है. पानी का तेज कर्रेंट (बहाव) और नीचे पैरों को खींचने वाली दलदली मिट्टी इतनी खतरनाक है कि कई गाड़ियाँ बीच नदी में ही बंद होकर फंस जा रही हैं, जिन्हें कई लोग मिलकर बमुश्किल बाहर निकाल पा रहे हैं.

टॉर्च की रोशनी में नारकीय सफर, रात के अंधेरे में बढ़ता है मौत का खतरा

अंधेरे का आलम: स्थानीय भुक्तभोगी ग्रामीणों ने बताया कि नदी का पानी बढ़ने के बाद हर साल इस पूरे घाट की स्थिति पूरी तरह नारकीय और डरावनी हो जाती है. सबसे खराब स्थिति सूर्यास्त के बाद यानी रात के समय उत्पन्न होती है, क्योंकि इस पूरे घाट परिसर या एप्रोच रोड पर जिला प्रशासन या पंचायत स्तर से रोशनी (लाइटिंग) की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है.

रात के घने अंधेरे में लोग अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट और हाथ की टॉर्च के सहारे किसी तरह इस डगमगाते और डूबे हुए चचरी पुल को पार करते हैं. पैर फिसलने का मतलब सीधे उफनती नदी के गहरे पानी में समा जाना है.

आपातकाल में ‘ऊपरवाले’ का भरोसा, पक्के पुल की मांग तेज

ग्रामीणों ने बेहद आक्रोशित लहजे में कहा कि इस टापू नुमा भौगोलिक बनावट के कारण आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) में अगर किसी बुजुर्ग, गंभीर मरीज या प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती महिला को उप स्वास्थ्य केंद्र या अमौर अस्पताल ले जाना हो, तो सब कुछ ‘ऊपरवाले’ (भगवान) के भरोसे छोड़ना पड़ता है. समय पर एम्बुलेंस या गाड़ी न मिलने से कई बार मरीजों की स्थिति एप्रोच रोड पर ही गंभीर हो जाती है.

ग्रामीणों की मुख्य मांग:

इलाके के प्रबुद्ध नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पूर्णिया जिलाधिकारी (DM) और स्थानीय विधायक से पुरजोर गुहार लगाई है कि आपदा प्रबंधन विभाग के तहत इस घाट पर तत्काल सरकारी स्तर पर नावों (सरकारी नाव) का परिचालन शुरू कराया जाए, ताकि चचरी पुल के पूरी तरह टूट जाने पर आवागमन ठप न हो. इसके साथ ही ग्रामीणों ने इस घाट पर एक स्थाई पक्के आरसीसी (RCC) पुल के निर्माण की मांग को दोबारा दोहराया है, जो पिछले कई दशकों से सिर्फ चुनावी वादों की फाइलों में दबा हुआ है.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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