जलालगढ़ का मां वैष्णवी धाम, स्टेशन अधीक्षक की प्रेरणा से बना था यह आस्था का केंद्र

Jalalgarh Maa Vaishnavi Dham: पूर्णिया जिले के जलालगढ़ में स्थित मां वैष्णवी धाम क्षेत्रवासियों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है.

पूर्णिया के जलालगढ़ से निकेश राय की रिपोर्ट

Jalalgarh Maa Vaishnavi Dham: पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर उत्तर में स्थित जलालगढ़ प्रखंड का मुख्य बाजार इन दिनों अध्यात्म की खुशबू से सराबोर है. यहाँ स्थापित मां वैष्णवी धाम के प्रति स्थानीय कारोबारियों, राहगीरों, कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों में असीम श्रद्धा है. इस इलाके के लोगों की सुबह और दिन की शुरुआत माता रानी के दर्शन और आशीर्वाद के साथ होती है. भौगोलिक दृष्टिकोण से यह मंदिर जलालगढ़ रेलवे स्टेशन के बिल्कुल समीप स्थित है, जिसके बगल से स्टेट हाईवे 60 (SH-60) गुजरती है, जबकि नेशनल हाईवे 27 (NH-27) यहाँ से महज 200 मीटर की दूरी पर है. आम दिनों के अलावा शारदीय नवरात्रि और दीपावली के अवसर पर यहाँ माता के दरबार की आकर्षक और अलौकिक सजावट की जाती है, जो श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है.

मन्नत पूरी होने पर सैकड़ों महिला श्रद्धालु चढ़ाती हैं ‘खोईंचा’

  • खोईंचा चढ़ाने की अनूठी परंपरा: इस मंदिर में सालों भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्रि के दौरान यहाँ का नजारा अद्भुत होता है. मन्नत पूरी होने पर महिला श्रद्धालुओं द्वारा माता के दरबार में पारंपरिक ‘खोईंचा’ का चढ़ावा अर्पण किया जाता है.
  • बाधाएं होती हैं दूर: स्थानीय पूजा कमेटी के मुख्य सदस्य जयकिशन राय बताते हैं कि नवरात्र के नौ दिनों में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं खोईंचा चढ़ाने दूर-दराज के गांवों से पहुंचती हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से माता की पूजा करने मात्र से जीवन की सभी बड़ी बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं.

वर्ष 1961 में बंगाल के स्टेशन अधीक्षक की प्रेरणा से पड़ी थी नींव

मंदिर का ऐतिहासिक सफर: इस सिद्ध पीठ की स्थापना के पीछे एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक कहानी छिपी है. स्थानीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि वर्ष 1961 में जलालगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंगाल के रहने वाले एक स्टेशन अधीक्षक (Station Superintendent) कार्यरत थे. वे माता के परम भक्त थे और उन्हीं की पावन प्रेरणा व प्रयासों से स्टेशन परिसर में माता की छोटी सी मढ़ी स्थापित की गई थी. धीरे-धीरे इस मुहिम में स्थानीय ग्रामीणों और रेल कर्मियों की सहभागिता बढ़ती गई. आज इस ऐतिहासिक स्थान पर दुर्गा पूजा के भव्य आयोजन को सफ़लपूर्वक 66 वर्ष पूरे हो चुके हैं. वर्तमान में स्थानीय स्तर पर एक सार्वजनिक कमेटी का गठन कर सामूहिक निर्णयानुसार मंदिर के सभी धार्मिक कार्य संपन्न कराए जाते हैं.

भव्य मंदिर का हो रहा है निर्माण; नवविवाहित जोड़े लेते हैं आशीर्वाद

जलालगढ़ बाजार स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर अब स्थानीय नागरिकों के सहयोग से एक बेहद भव्य और दर्शनीय मंदिर का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. इस मंदिर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में होने वाले किसी भी मांगलिक कार्य, विशेषकर शादी-विवाह के दौरान नवविवाहित वर-वधू अपने वैवाहिक जीवन की सुखमय शुरुआत के लिए माता वैष्णवी का आशीर्वाद लेने यहाँ जरूर पहुंचते हैं. प्रतिदिन सुबह से ही यहां वैदिक रीति-रिवाज और शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ महाआरती का सिलसिला जारी रहता है, जो आने वाले हर मुसाफिर को शांति का अहसास कराता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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