विद्यार्थियों ने दार्जिलिंग भ्रमण कर पर्वतारोहण से संबंधित जानकारियां प्राप्त की

गोरेलाल मेहता कॉलेज, बनमनखी ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव व प्रेरणादायी पहल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है.

जीएलएम कॉलेज ने 13 छात्र-छात्राओं को करायी सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग की शैक्षणिक यात्रा बनमनखी. गोरेलाल मेहता कॉलेज, बनमनखी ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव व प्रेरणादायी पहल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह विश्वविद्यालय का पहला ऐसा संस्थान बन गया है जिसने शैक्षणिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व वनस्पति आधारित त्रिदिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का सफल आयोजन कर विद्यार्थियों को अनुभवात्मक शिक्षा से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया है. इस विशेष शैक्षणिक यात्रा के अंतर्गत कॉलेज के सांस्कृतिक दल के 13 चयनित छात्र-छात्राओं को सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, खरसांग व दार्जिलिंग के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों के भ्रमण पर भेजा गया. यह भ्रमण प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरों तथा जैव विविधताओं के अध्ययन का एक अनूठा अवसर सिद्ध हुआ. दार्जिलिंग प्रवास के दौरान विद्यार्थियों ने हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान का भ्रमण कर पर्वतारोहण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. संस्थान के संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक उपकरणों व विरासत सामग्रियों ने विद्यार्थियों को साहसिक अभियानों के इतिहास से परिचित कराया. इसके उपरांत दल ने पद्मजा नायडू हिमालयन जूलॉजिकल पार्क का भ्रमण किया, जहां दुर्लभ वन्यजीवों व पक्षियों को निकट से देखकर विद्यार्थियों को जैव विविधता की गहन समझ प्राप्त हुई. साथ ही, तेनजिंग रॉक व विश्वप्रसिद्ध चाय बागानों के अवलोकन ने विद्यार्थियों को प्राकृतिक व सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव कराया. यात्रा के क्रम में विद्यार्थियों ने लाटागुड़ी स्थित गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने वन्यजीवों तथा प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन किया. इस शैक्षणिक यात्रा का नेतृत्व कॉलेज की सांस्कृतिक समिति की प्रभारी प्राध्यापक डॉ. शारदा वंदना ने किया. इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद भारतीय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे. हिमालयन पर्वतारोहण संस्थान में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ना आज की आवश्यकता है.यात्रा की समन्वयक डॉ. शारदा वंदना के साथ सह-समन्वयक के रूप में जंतु विज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ. अर्पिता राय व प्रधान सहायक बाबुल कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इनके अतिरिक्त जीवछ कुमार व किशोर कुमार ने भी सहयोग प्रदान किया. इस संबंध में सह-समन्वयक डॉ. अर्पिता राय ने बताया कि गोरे लाल मेहता कॉलेज ने यह सिद्ध कर दिया है कि सशक्त नेतृत्व व सकारात्मक पहल के बल पर ग्रामीण क्षेत्र के संस्थान भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकते हैं.

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