हे, छठी माई... किरपा करीं, अबकी हमरा के विधायक बना दिही....

अबकी हमरा के विधायक बना दिही....

पूर्णिया में कहीं प्रत्याशी खुद तो कहीं उनकी पत्नियां व्रत रख आज मांगेंगे मन्नतें

चुनाव में विजयश्री कीउम्मीदों के साथ प्रत्याशियों के घर हो रहा छठ का अनुष्ठान

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पूर्णिया. भगवान भास्कर की अराधना के इस महापर्व की महिमा अपरम्पार है. कहते हैं, श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजन अनुष्ठान से छठी मैया हर मन्नत पूरी करती हैं. यह मान्यता भी रही है. इसी मान्यता के आलोक में जिले में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी कहीं खुद छठ का व्रत कर रहे हैं तो कहीं उनकी पत्नियां व्रत रख रही हैं. ये सभी सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पित कर मन्नतें मांगेंगे… हे, छठी माई… किरपा करीं, अबकी हमरा के विधायक बना दिही….पत्नियां भी इसी तर्ज पर अपने प्रत्याशी पति के लिए छठी मैया से प्रार्थना करेंगी. छठी मैया के प्रति असीम आस्था रखने वाले प्रत्याशियों के घरों में पूरी निष्ठा के साथ रविवार को खरना की पूजा-अर्चना की गई.

गौरतलब है कि जिले के सभी सातों सीटों के लिए कुल 69 प्रत्याशियों नें दो दर्जन से अधिक प्रत्याशियों के घरों में छठ महापर्व का पूजन अनुष्ठान किया जा रहा है. इसमेँ कई ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो इस महापर्व की महिमा सुनकर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पहली बार पूजन अनुष्ठान कर रहे हैं. पूर्णिया के एक प्रत्याशी ने कहा कि इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं क्योंकि उनके घर हर साल यह अनुष्ठान होता है. वे खुद छठी मैया के प्रसाद का डाला उठाकर घाट जाते हैं और अर्घ भी देते हैं. कई ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो खुद पानी में खड़ा होकर अनुष्ठान करने वाले हैं. पहली बार छठ पूजा करने वाली प्रत्याशियों की पत्नियों को पूरा भरोसा भी है जीत उन्हीं की झोली में जाएगी. दूसरी ओर कई ऐसे प्रत्याशी हैं जो पूजन-अनुष्ठान की बजाय क्रमवार रुप से सभी छठ घाटों का भ्रमण करने की तैयारी में हैं. इस दौरान सोमवार कीशाम और मंगलवार की सुबह वे अलग-अलग घाटों पर पहुंचेंगे. समय रहते अर्घ देंगें और अपनी जीत के लिए छठी मैया से विनती भी करेंगे. जानकार कहते हैं कि एक साथ दो काम होगा. एक तो वे अर्घ देकर पुण्य का लाभ लेंगे और फिर घाट भ्रमण के बहाने चुनावी अभियान और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन का जतन भी करेंगे. प्रेक्षक बताते हैं कि छठ महापर्व को कई प्रत्याशी जनता से भावनात्मक रूप से जुड़ने के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं. यही वजह है कि कई प्रत्याशी अपने चुनावी कार्यक्रम के साथ-साथ छठ के व्रत को निभाते हुए देखे जा रहे हैं.

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