पूर्णिया में मौसम का 'ऑरेंज अलर्ट': भारी बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा

पूर्णिया जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है, जिसके चलते 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है. मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है. लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

सीमांचल के पूर्णिया जिले में रविवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है और आसमान में काले घने बादलों ने डेरा जमा लिया है. मौसम विज्ञान केंद्र ने जिले में प्रतिकूल मौसम को देखते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है. मौसम विभाग के अनुसार आज पूर्णिया और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में मूसलाधार बारिश के साथ तेज आंधी और भीषण आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है. मौसम के बदलते रुख को देखते हुए लोगों को बेवजह घरों से बाहर न निकलने और अत्यंत आवश्यक होने पर छाता व रेनकोट साथ लेकर ही यात्रा करने की हिदायत दी गई है.

ऑरेंज अलर्ट जारी, आंधी और बिजली गिरने का अंदेशा

मौसम पूर्वानुमान इंडेक्स के मुताबिक जिले में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और रुक-रुक कर तेज गर्जन के साथ भारी बारिश हो सकती है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने विशेष रूप से वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर-पूर्वी बिहार के इस हिस्से में चक्रवाती दबाव के कारण आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं घट सकती हैं, जिसको लेकर आम नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी.

तापमान में गिरावट, रात की बारिश से सुहावना हुआ मौसम

बीती रात जिले के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई, जिसके चलते रविवार की सुबह से ही वातावरण में ठंडक घुल गई है और मौसम खुशनुमा बना हुआ है. रविवार को पूर्णिया का अधिकतम तापमान 32.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 26.0 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है. सुबह से ही कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में हल्की फुहारें पड़ रही हैं, जिससे लोगों को पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली है.

मौसम विभाग की एडवाइजरी, खुले मैदान और पेड़ों से बनाएं दूरी

आपदा प्रबंधन और मौसम विभाग ने लोगों से सरकारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है. बारिश और बादलों की तेज गड़गड़ाहट के दौरान किसी भी सूरत में ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, कच्चे मकानों या खुले मैदानों में न रुकें. किसानों और राहगीरों को सलाह दी गई है कि मौसम खराब होते ही वे किसी पक्के और सुरक्षित आश्रय स्थल में चले जाएं, ताकि वज्रपात से होने वाले किसी भी जान-माल के नुकसान से बचा जा सके.

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लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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