– साइबर फ्रॉड के शिकार हेडमास्टर ने साइबर थाना व जलालगढ़ थाने में दिया आवेदन, जांच में जुटी पुलिस जलालगढ़(पूर्णिया). बिजली मीटर के लिए अप्लाई करने के बाद 100 रुपये का यूपीआइ पेमेंट करना एक हेडमास्टर को महंगा पड़ गया. दरअसल, यह एक साइबर ट्रैप था जिसमें फंसकर पीड़ित शिक्षक ने महज 14 मिनट में अपने बैंक खाते से दो लाख रुपये गंवा दिये. पीड़ित मो मनवर हुसैन जलालगढ़ प्रखंड के मध्य विद्यालय डिमिया पूरब के प्रधानाध्यापक बताये गये. इस मामले में जलालगढ़ थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि शिक्षक द्वारा आवेदन दिया गया है. साइबर थाना में भी आवेदन दिया है. मामला साइबर फ्रॉड से जुड़ा है. पीड़ित हेडमास्टर मो मनवर हुसैन ने बताया कि वह विद्युत मीटर के लिए अप्लाई किये थे. 7 फरवरी को शाम करीब 7:45 बजे कॉल आया और 12 मिनट तक बात हुई. उधर से कहा गया कि विद्युत विभाग कसबा प्रखंड के कनीय अभियंता बोल रहे हैं. आप विद्युत मीटर के लिए अप्लाई किये हैं. इसके लिए एक सौ रुपये आपको इसी मोबाइल नंबर पर यूपीआइ पेमेंट करना है. पीड़ित हेडमास्टर ने बताया कि उस नंबर को जब यूपीआइ पेमेंट के लिए डाला तो उसमें एनबीपीडीसीएल लिखा हुआ आया. इसे सत्य समझ कर एक सौ रुपये भेज दिया. 8:05 बजे 100 रुपये अपने से यूपीआइ पेमेंट किया. उसके बाद महज 14 मिनट में दो लाख रुपये की निकासी हो गयी. बताया कि उसके बाद वे मोबाइल फोन को सुबह देखे तो उनके मोबाइल में बैंक ट्रांजेक्शन का मैसेज आया है. जिसे पढ़ा तो उसके एक सौ रुपये के बाद तीन बार ट्रांजेक्शन हुआ है. इसमें पहले 95 हजार रुपये, फिर 5 हजार रुपये और उसके बाद एक लाख रुपये कर बैंक खाते से दूसरे अकाउंट में गया है. बैंक से जब डिटेल लिया गया तो पता चला कि 8:12 बजे देबाशीष घोष नामक व्यक्ति को 95 हजार रुपये, 8:17 बजे एवं 8:19 बजे क्रमशः 5 हजार और एक लाख रुपये एक्सिस बैंक के अकाउंट में गया है, जबकि एक सौ रुपये के बाद कोई भी राशि उनके द्वारा नहीं भेजी गयी और न ही उसने फोन का ही इस्तेमाल किया. मामले को लेकर पीड़ित शिक्षक ने साइबर क्राइम पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज करायी. साइबर थाना पूर्णिया और जलालगढ़ थाना में इसका लिखित आवेदन दिया. इस साइबर फ्रॉड मामले से शिक्षक काफी परेशान हैं.
बिजली मीटर के लिए 100 रुपये यूपीआइ पेमेंट कर महज 14 मिनट में हेडमास्टर ने गंवाये दो लाख
बिजली मीटर के लिए अप्लाई करने के बाद 100 रुपये का यूपीआइ पेमेंट करना एक हेडमास्टर को महंगा पड़ गया.
