गुलाबबाग को पार्क नसीब नहीं, चारागाह बना मेला ग्राउंड

चारागाह बना मेला ग्राउंड

बनना था बच्चों का पार्क पर कहीं कब्जा तो कहीं बांस का कारोबार

पूर्णिया. शहर के गुलाबबाग में जिस मेला ग्राउंड पर कभी बच्चों के लिए पार्क का निर्माण किया जाना था वहां पूरा ग्राउंड गंदगी और कचरा से भरा है. स्थानीय नागरिक इसे विडम्बना बताते हैं कि गुलाबबाग में लोगों को एक अदद पार्क की सुविधा भी नसीब नहीं हो सकी है. मेला ग्राउंड जानवरों का चारागाह बनकर रह गया है. आलम यह है कि इस ग्राउंड पर कहीं किसी का कब्जा है तो कहीं बांस का कारोबार चल रहा है. स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से जिला मुख्यालय की तरह गुलाबबाग में पार्क निर्माण कराने की मांग की है.

गौरतलब है कि मेला ग्राउंड के सौंदर्यीकरण को लेकर पिछले कई सालों से प्रशासन का ध्यान आकृष्ठ कराया जा रहा है. याद रहे कि वर्ष 2011 से ही यहां पार्क की योजना पर चर्चा शुरू हुई थी और बाद के दिनों में न केवल योजना स्वीकृत की गई बल्कि वर्ष 2016 में 02 करोड़ 07 लाख 23 हजार 800 की राशि का डीपीआर भी बनाया गया था. उस समय 18 माह के अंदर पार्क निर्माण किए जाने की घोषणा की गई थी पर कालांतर में यह पेंडिंग रह गया. जानकारों ने बताया कि जमीन के मालिकाना हक के पेंच में पार्क निर्माण की योजना अधर में लटकी रह गई. जानकारों ने बताया कि मेला ग्राउंड की जमीन बिहार सरकार के अधीन है जबकि पार्क का निर्माण नगर विकास विभाग द्वारा किया जाना था. हालांकि नगर विकास विभाग की ओर से पहल हुई पर जमीन के हस्तांतरण का पेंच खत्म नहीं हो सका.

बच्चे हैं परेशान, नहीं है मनोरंजन का स्थान

आलम यह है कि आज सुबह शाम घूमने की यहां कोई जगह नहीं है. पार्क के अभाव के यहां के बच्चे परेशान हैं जो वह घर की चहारदीवारी में कैद होकर रह गए हैं. वह स्वछंद होकर खुले में खेल भी नहीं पा रहे हैं. वह खुले स्थान में अपने दोस्तों के साथ मस्ती करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कोई पार्क यहां नहीं है. युवा और बुजुर्ग के लिए भी इसकी जरुरत महसूस की जा रही है. हालांकि जिला मुख्यालय में हालिया सालों में कई पार्क विकसित किए गये पर इस इलाके में एक भी पार्क नहीं है जबकि 23 एकड़ से सिकुड़ कर शेष बचे करीब 10 एकड़ भूखंड पर बड़ा पार्क विकसित किया जा सकता है.

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आंकड़ों पर एक नजर

2011 से ही पार्क की योजना पर चल रही चर्चा

2016 में योजना के अनुरुप बनाया गया पार्क का डीपीआर

02 करोड़ सात लाख से अधिक राशि की दी गई थी स्वीकृति

10 एकड़ के करीब मेला ग्राउंड का बचा है अभी भूखंड

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