पूर्णिया शहर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर विशेष रूप से भगवान गणेश (बुद्धि के देवता) और माता लक्ष्मी (धन-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी) की एक साथ पूजा-अर्चना के लिए पूरे सीमांचल क्षेत्र में विख्यात है.
श्रद्धालुओं की गहरी मान्यता है कि इस पवित्र दरबार में सच्चे मन से हाजिरी लगाने और दर्शन मात्र से जीवन में सुख, शांति और ऐश्वर्य का वास होता है, तथा भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
सुबह-शाम गूंजती है आरती, दीपावली पर दिखती है अलौकिक छटा
गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी में प्रतिदिन सुबह और संध्या के समय वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नियमित रूप से विशेष आरती और पूजा-अर्चना की जाती है.
आरती के समय मंदिर का वातावरण शंख और घंटों की ध्वनि से पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है, जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटती है. वैसे तो यहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन दीपावली और धनतेरस के पावन अवसर पर गणेश-लक्ष्मी पूजा के दौरान मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जाता है और यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है.
एक ही प्रांगण में कई देवी-देवताओं का दिव्य दरबार
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल और समावेशी स्वरूप है. गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर में मुख्य रूप से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के अलावा कई अन्य देवी-देवताओं के मनोहारी विग्रह स्थापित हैं:
- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण (राम दरबार)
- युगल सरकार श्री राधा-कृष्ण
- जगतपालक भगवान विष्णु
- मां दुर्गा के अलौकिक नौ स्वरूप (नवदुर्गा)
- सपरिवार देवाधिदेव महादेव (शिव परिवार) और संकटमोचन हनुमान जी. इन सभी देवी-देवताओं के एक ही परिसर में विराजमान होने के कारण इस मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
80 के दशक में रखी गई नींव, 2013 में विराजे गणेश-लक्ष्मी
गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी का इतिहास कई दशक पुराना है. मंदिर की मूल स्थापना 1980 के दशक में हुई थी, जबकि यहां भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की भव्य प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा वर्ष 2013 में पूरे विधि-विधान के साथ की गई.
इस भव्य मंदिर के निर्माण और विकास में स्थानीय समाजसेवी रोहित यादव, संत मुरारी बाबा और घनश्याम दास सहित कई धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं का अतुलनीय योगदान रहा है. विशेष बात यह है कि पूर्णिया शहर की प्रसिद्ध और ऐतिहासिक दुर्गा पूजा का आयोजन भी इसी ठाकुरबाड़ी परिसर में होता है, जो इसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों का भी प्रमुख केंद्र बनाता है.
