GMCH: पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट: पूर्णिया जिला मुख्यालय स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) का विशाल परिसर इन दिनों न केवल आधुनिक चिकित्सा बल्कि अटूट मानवीय आस्था के लिए भी चर्चा में रहता है. इस परिसर में अवस्थित ‘भगवान श्री राधा कृष्ण का भव्य मंदिर’ अस्पताल में आने वाले हजारों मरीजों और उनके तीमारदारों (परिजनों) के जीवन को एक नई मानसिक शक्ति और संबल प्रदान कर रहा है. गंभीर से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज जब अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो एक तरफ डॉक्टरों की ‘दवा’ और दूसरी तरफ इस चौखट से मिलने वाली ‘दुआ’ के अनूठे संगम के सहारे वे जिंदगी की जंग जीत जाते हैं. यही वजह है कि ओपीडी (OPD) या इमरजेंसी में आने वाला हर दूसरा शख्स इस मंदिर में मत्था टेकना कभी नहीं भूलता.
आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम: प्रबुद्ध जनों ने माना सकारात्मक
अस्पताल के प्रबुद्ध चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की मानें तो इस मंदिर की मौजूदगी अस्पताल के माहौल में एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करती है. चिकित्सा विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि मरीज के ठीक होने में उसकी मानसिक स्थिति और इच्छाशक्ति की बहुत बड़ी भूमिका होती है.
अस्पताल आने वाले कई लोग इस परिसर को आस्था और आधुनिक विज्ञान का बेहतरीन मिलन कहते हैं. यहाँ जब कोई परिजन आईसीयू या वॉर्ड में तड़प रहे अपने मरीज की सलामती के लिए रोता हुआ इस मंदिर की चौखट पर पहुंचता है, तो उसे एक असीम मानसिक शांति और नई उम्मीद मिलती है, जो अंततः मरीज को जल्द स्वस्थ कर मुस्कुराते हुए घर लौटने में मदद करती है.
पुराने सदर अस्पताल से GMCH तक: डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की है अटूट निष्ठा
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (तत्कालीन पुराना पूर्णिया सदर अस्पताल) परिसर में स्थित यह मंदिर न केवल मरीजों, बल्कि यहाँ चौबीसों घंटे ड्यूटी पर तैनात रहने वाले डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए भी आस्था का मुख्य केंद्र है.
- अस्पताल कर्मियों का जुड़ाव: मंदिर की दैनिक देखरेख, सुबह-शाम की आरती और व्यवस्था के संचालन में अस्पताल के कर्मचारियों के साथ-साथ कई वरीय चिकित्सक भी बढ़-चढ़कर अपनी व्यक्तिगत भागीदारी निभाते हैं.
- जन्माष्टमी पर भव्य आयोजन: हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस मंदिर को दुल्हन की तरह विशेष रूप से सजाया जाता है. उस दिन यहाँ जीएमसीएच के डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और पूरे पूर्णिया शहर से आए हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
सड़क किनारे से जीएमसीएच के भव्य गर्भगृह तक का सफर
श्री राधा कृष्ण मंदिर के सटीक स्थापना वर्ष का कोई लिखित और स्पष्ट सरकारी दस्तावेज तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन अस्पताल के आसपास रहने वाले कई बुजुर्ग बताते हैं कि यह मंदिर इस आधुनिक अस्पताल के बनने के दशकों पहले से यहाँ स्थापित है.
मंदिर के विस्थापन और पुनरुद्धार की कहानी:
जीएमसीएच के नए कंक्रीट भवनों के निर्माण से पूर्व यह छोटा सा मंदिर तत्कालीन सदर अस्पताल के मुख्य गेट से बिल्कुल सटकर सड़क के किनारे अवस्थित था. पूर्णिया शहर में जब राष्ट्रीय राजमार्ग (सिक्सलेन) के निर्माण की रूपरेखा तैयार हुई, तो यह मंदिर सड़क चौड़ीकरण की जद में आ गया. उस वक्त इसे हटाने या अन्यत्र शिफ्ट करने पर काफी विचार-विमर्श हुआ. अंततः, जनभावनाओं का आदर करते हुए और जीएमसीएच के मास्टर प्लान के तहत, इस मंदिर को बेहद सम्मानपूर्वक अस्पताल परिसर के भीतर ही एक सुरक्षित और सुंदर स्थान पर पुनर्प्रतिष्ठापित किया गया. आज यह एक भव्य मंदिर का रूप ले चुका है, जहां भगवान श्री कृष्ण अपनी आल्हादिनी शक्ति राधा रानी के संग संगमरमर के विग्रह के रूप में विराजमान हैं और हर आने-जाने वाले दुखी मन को संबल दे रहे हैं.
