नौकरी दिलाने के नाम पर हुई ठगी मामले में डायल-112 के दो चालक समेत चार गिरफ्तार
प्राइवेट बैंक में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों की हुई अवैध वसूली मामले में के नगर थाना की पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
अररिया जिले नरपतगंज के रहनेवाले रोहन कुमार साह की शिकायत पर हुई कार्रवाई पूर्णिया. प्राइवेट बैंक में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों की हुई अवैध वसूली मामले में के नगर थाना की पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार अभियुक्तों में के नगर थाना अंतर्गत डायल 112 का चालक नितेश कुमार, चंपानगर थाना के डायल 112 गाड़ी का चालक रविंद्र कुमार के अलावा जानकी नगर वार्ड 17 का अजय यादव एवं चकमाका वार्ड 9 का नवीन कुमार शामिल है. इस संबंध में एसपी स्वीटी सहरावत ने बताया कि पैसों के बंटवारा में इन दोनों चालकों की संलिप्तता पायी गयी है. दोनों चालकों ने भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. एसपी ने बताया कि इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. बताया जाता है कि अररिया जिले के नरपतगंज थाने के पलासी निवाासी रोहन कुमार साह की जोगबनी में दुकान है. कालांतर में रोहन की दोस्ती अजय यादव से हुई. अजय पूर्णिया जिले के जानकीनगर का रहनेवाला है. जब दोनों की दोस्ती बढ़ी तो रोहन ने अपनी परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में अजय से शेयर किया था. अजय ने भरोसा दिलाया था कि जरूरत पड़ेगी तो हम कहीं प्राइवेट बैंक में नौकरी दिलवा देंगे. इस बीच लॉक डाउन में रोहन की दुकान बंद हो गयी और वह सड़क पर आ गया. उसने इस विषम परिस्थिति में अपने दोस्त अजय का ख्याल आया और उससे अपनी बात रखी. अजय ने कहा कि वह निजी बैंक में नौकरी दिलवा देगा, लेकिन इसके लिए दो लाख रुपये लगेगा. रोहन तैयार हो गया. दोनों की मुलाकात केनगर थाने के बाघमारा में हुई. तय समय पर रोहन पैसे लेकर बाघमारा पहुंचा. इसी बीच अजय ने अपने सहयोगी को यह कह कर बुला लिया कि जैसे ही रोहन पैसे लेकर आयेगा वैसे ही तुम डायल-112 को बुला लेना. पुलिस मुझे लेकर चली जायेगी और इसके बाद आपस में पैसे का बंटवारा कर लिया जायेगा. योजना के मुताबिक, रोहन पहुंचा. उसने बताया कि दो लाख के एवज में 1 लाख 70 हजार रुपये ही हो पाया है. जब रोहन रुपये गिन रहा था तभी अजय का सहयोगी नवीन ने डायल-112 को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस पहुंच गयी और अजय को पकड़ कर अपने साथ ले गयी. यह सब देख कर रोहन घबरा गया और वह वापस अपने घर लौट गया. इस बीच रोहन अपने दोस्त का पता करने के नगर थाना पहुंचा. जब उसने पूरी कहानी बतायी तो के नगर पुलिस ने बताया कि यहां इसकी न तो कोई सूचना है और न कोई अजय नाम का कोई व्यक्ति पकड़ा कर थाना लाया गया है. रोहन निराश हो गया. फिर उसने फेसबुक से अजय यादव का पता ढूंढ निकाला. फेसबुक पर उसका पता जानकीनगर था. रोहन फिर जानकीनगर पुलिस से संपर्क किया. जानकीनगर पुलिस ने फेसबुक को देखकर अजय को पहचान लिया. दरअसल अजय का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है. जानकीनगर पुलिस ने बिना देर किये अजय को गिरफ्तार कर लिया. उसके निशानदेही पर उसका सहयोगी नवीन यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया. जाननकीनगर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर के नगर पुलिस को सुपुर्द कर दिया. जब यह मामला एसपी के संज्ञान में आया तब उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बनमनखी एसडीपीओ और सदर एसडीपीओ को जांच का जिम्मा सौंपा. पुलिस की जांच में आरोप सही पाया गया. इसके बाद दोनों चालकों को गिरफ्तार कर लिया गया.
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