जी राम जी को लेकर कोई भ्रम मत पालिये, मनरेगा से ज्याादा सुदृढ : डीडीसी

मनरेगा से ज्याादा सुदृढ : डीडीसी

पहली अप्रैल से मनरेगा की जगह लेगा जी राम जी अधिनियम

पूर्णिया. इस वर्ष पहली अप्रैल 2026 से पूर्णिया जिले में जी राम जी के तहत कार्य शुरू होगा और यह पूर्व में चल रही मनरेगा योजना की जगह ले लेगा. इसके अंतर्गत चार तरह के कार्य होंगे. इसमें जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण, ग्रामीण मूलभूत एवं आजीविका, ग्रामीण रेजिलियेंस और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए आवश्यक कार्य होंगे. मुख्य रूप से स्थानीय कार्य सड़क, नाला, मिटटी आदि के कार्य, जल में तालाब, आहर, पोखर, वृक्षारोपण आदि के कार्य एवं सूखती नहरों को ठीक करने और मौसम के अनुसार किस स्थान के लिए कौन सी फसल अच्छी रहेगी पहले से चिन्हित कर कार्य कराए जायेंगे. उक्त बातें पूर्णिया के उप विकास आयुक्त अंजनि कुमार ने समाहरणालय स्थित प्रेस भवन में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान कही. डीडीसी श्री कुमार ने विकसित भारत जी राम जी अधिनियम को लेकर फैले भ्रम को दूर करते हुए कहा कि जी राम जी के तहत 10 महत्वपूर्ण बातें हैं. इसे पूर्व में चल रहे मनरेगा कार्यक्रम से और भी सुदृढ़ बनाया गया है. इसमें 125 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की गयी है. इसमें राज्य सरकार फसलों की बुआई एवं कटायी के मौसम को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष कुल 60 दिनों की अवधि के लिए अधिसूचना जारी करेगी. इस दौरान इस अधिनियम के तहत कार्य नहीं कराए जायेंगे.

केंद्र प्रायोजित योजना में राज्य का हिस्सा 60:40

उन्होंने बताया कि यह केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 के अनुपात में होगा जबकि केंद्र शासित प्रदेशों और उत्तर पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों में यह 90:10 रखा गया है. उन्होंने बताया कि इस योजना में जल संसाधन विभाग की भागीदारी को भी सुनिश्चित की गयी है जिससे जितनी नहरें और जल श्रोत सूख चुके हैं अथवा कार्यरूप में नहीं हैं उनके लिए नदी के बहाव से कार्य शुरू किये जायेंगे. सूखी नहरों और जलश्रोतों के लिए जल संसाधन विभाग नहरों की सूची एवं कार्य योजना तैयार करेगी और इसकी स्वीकृति, मानक के अनुरूप जिला प्रशासन के सक्षम अधिकारी द्वारा दी जायेगी.

मजदूरों को काम देने में पूरी पारदर्शिता होगी

श्री कुमार ने कहा जी राम जी के तहत मजदूरों को काम दिए जाने के मामलो में पूर्ण पारदर्शिता की व्यवस्था की गयी है. यह जिला 100 दिनों के रोजगार उपलब्ध कराने एवं कामगारों के शत प्रतिशत ई केवाईसी कराने में सूबे में अव्वल रहा है. उन्होंने कहा ई केवाईसी के बिना अब किसी को भी भुगतान करना संभव नहीं हो सकेगा साथ ही बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ साथ फेसियल रिकोग्निशन (चेहरा पहचान) को अनिवार्य बनाया गया है. योजना के क्रियान्वयन को लेकर सोशल ऑडिट को और भी पारदर्शी बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जल संसाधन के बनमनखी, बथनाहा और नरपतगंज तीन डिविजन कार्य कर रहे हैं. जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जाना है.

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By SATYENDRA SINHA

SATYENDRA SINHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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