जिले में बढ़ा डेंगू का प्रकोप, जीएमसीएच में चार मरीज भर्ती

जीएमसीएच में चार मरीज भर्ती

एक ही परिवार के पति पत्नी के अलावा दो छोटे बच्चे भी शामिल

पूर्णिया. जिले में एक बार फिर डेंगू का असर देखा जा रहा है. फिलहाल राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल स्थित डेंगू वार्ड में डेंगू के चार मरीज भर्ती है जिनका इलाज चल रहा है. इनमें एक ही परिवार के दो लोग डेंगू से पीड़ित हैं दोनों पति पत्नी हैं जबकि अलग अलग स्थानों के दो छोटे बच्चे हैं. इनमें से एक डेंगू पीड़ित बच्चा कटिहार जिले के फलका प्रखंड का है जबकी पीड़ित पति पत्नी, मोरारी टोला वार्ड संख्या 14 कसबा निवासी हैं और एक गुलाबबाग के बरसौनी पतिलवा का रहनेवाला है. पीड़ित मरीजों के परिजनों ने बताया कि मरीज को बुखार की शिकायत थी स्थानीय चिकित्सकों द्वारा जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उन्हें जीएमसीएच लाया गया यहां भी जांच के बाद सभी का इलाज चल रहा है. अमूमन डेंगू का असर बरसात की समाप्ति के कगार पर तेज रहता है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रायः सितम्बर के महीने में इसके प्रकोप का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. प्राप्त आंकड़े के अनुसार इस वर्ष सितम्बर के महीने में डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या बीते वर्ष की तुलना में थोड़ी सी ज्यादा रही और यह 15 पर पहुंच गयी. मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष अबतक जिले में डेंगू मरीजों की कुल संख्या 38 हो गयी है. चिकित्सकों का मानना है कि अक्टूबर से इसका असर धीरे धीरे कम होने लगता है लेकिन अक्टूबर माह के आखिर में इसकी संख्या में इजाफा हुआ और फिलहाल डेंगू के चार मरीज जीएमसीएच में इलाजरत हैं.

रैपिड एंटीजेन और एलिजा टेस्ट से होती है पहचान

चिकित्सकों के अनुसार डेंगू बुखार, डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. यह एक विशेष प्रकार के एडीस मच्छर से फैलने वाला संक्रमण है. आम तौर पर इसके लक्षण फ़्लू से मिलते जुलते हैं. डेंगू बुखार में मरीज के खून में प्लेटलेट्स की संख्या काफी कम हो जाती है. डेंगू संक्रमण के कई लक्षण शरीर पर दिखाई पड़ते हैं इनमें तेज बुखार, उल्टी, पूरे शरीर में अत्यधिक दर्द प्रमुख हैं. लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही डेंगू का संक्रमण नहीं माना जा सकता इसके लिए रक्त की जांच जरुरी है. रैपिड एंटीजेन और एलिजा टेस्ट के द्वारा इसकी पहचान की जाती है.

बोले उपाधीक्षक

जीएमसीएच में इक्का दुक्का डेंगू मरीजों के आने का क्रम जारी ही है. फिलहाल 4 लोग भर्ती हैं जिनका इलाज किया जा रहा है. दो बच्चा वार्ड से आये हैं और दो जेनरल वार्ड से. डेंगू की पुष्टि के बाद यहां विशेष रूप से तैयार डेंगू वार्ड में सभी को रखा गया है और उनका इलाज चल रहा है. सभी की स्थिति में सुधार है लेकिन अभी भी सभी लोगों को डेंगू से सावधान रहने की जरुरत है. डॉ. भरत कुमार, उपाधीक्षक जीएमसीएच

बचाव के उपाय

– घरों और आसपास की साफ़ सफाई जरुरी है- कहीं भी जलजमाव न हो- एसी, कूलर, फ्रीज ट्रे आदि में पानी जमा न होने दें- सोते समय दिन में भी मच्छरदानी का प्रयोग जरुर करें- मच्छर मक्खियों को पनपने से रोकें

डेंगू के संभावित लक्षण

– तेज बुखार का रहना,- मरीज को ठण्ड लगना- जोड़ों, पीठ, सिर, पेट या मांसपेशी में दर्द- त्वचा पर लाल चकत्ता अथवा धब्बा हो जाना- बार बार उल्टी का होना- थकान और बेचैनी होना- रक्तचाप का तेजी से गिरना

डेंगू होने पर मरीज का आहार विहार

– डेंगू की पुष्टि होने पर मरीज को आरामदायक स्थिति में रखने की जरुरत होती है- मरीज को मच्छरदानी के अन्दर रखें ताकि इसके वायरस को फैलने से रोका जा सके- मरीज को सुपाच्य भोजन ही देना चाहिए- शुद्ध पेयजल की पर्याप्त मात्रा का सेवन जरुरी है- ताजी सब्जियों के सूप, जूस, नींबू पानी, नारियल पानी लाभदायक हैं- संतरा, चुकंदर, पपीता एवं उसकी पत्तियों के रस का सेवन फायदेमंद है.

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Author: SATYENDRA SINHA

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