मुख्य बातें:
पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट
Das River Embankment Breach: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र में मानसून की दस्तक और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण नदियों ने रौद्र रूप संधारित करना शुरू कर दिया है. पूर्णिया जिले के बाढ़ प्रभावित अमौर प्रखंड से एक बड़ी और विसंगतिपूर्ण खबर सामने आ रही है, जहां रंगरैया लालटोली पंचायत अंतर्गत भागताहिर गांव के पास दास नदी पर बना मुख्य सुरक्षा बांध बाढ़ के पानी के भारी दबाव और तेज करंट को झेल नहीं पाया और विधिक रूप से टूटकर नदी में विलीन हो गया. बांध टूटने से सीमावर्ती ग्रामीण प्रक्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे हजारों की आबादी संकट में मुस्तैद हो गई है.
सड़क संपर्क पूरी तरह भंग; मुख्य मार्गों पर बहा कई फीट पानी
बाढ़ की भयावहता और मुख्य कड़ियों की लाइव जमीनी जानकारियां इस प्रकार हैं. पिछले कुछ दिनों से दास नदी के जलस्तर में सुचारू रूप से दर्ज की जा रही बढ़ोतरी के बाद गुरुवार-शुक्रवार की रात अचानक बांध का एक बहुत बड़ा हिस्सा कटकर तेज धार में बह गया.
बांध के जमींदोज होते ही भागताहिर और उसके आसपास के दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय तथा जिला कड़ियों के मुख्य मार्गों से संपर्क विधिक रूप से पूरी तरह कट चुका है. ग्रामीण सड़कों पर कई फीट ऊंचा बाढ़ का पानी लाइव बह रहा है, जिसके कारण पैदल चलना अथवा दोपहिया वाहनों का परिचालन पूरी तरह नामुमकिन हो गया है.
टापू बन गए ग्रामीण इलाके; कली-मजदूरों और ग्रामीणों के सामने राशन का संकट
“स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और कली-मजदूरों ने बताया कि बांध टूटने के बाद पूरा भागताहिर प्रक्षेत्र एक जलमग्न टापू में तब्दील हो चुका है. ग्रामीण अपनी दैनिक घरेलू जरूरतों, मवेशियों के चारे और चिकित्सा जैसी आपातकालीन विसंगतियों के लिए पूरी तरह बेबस हो गए हैं. अचानक आए इस जलप्रलय के कारण खेतों में लगी कनिष्ठ फसलें भी डूब गई हैं और प्रशासन की ओर से अब तक नावों की कोई सुचारू व्यवस्था मुस्तैद नहीं की जा सकी है.”
पटना: जेपी गोलंबर रोड पर चौकीदार और दफादारों का प्रदर्शन शुरू. प्रदर्शन के कारण हुआ सड़क जाम.
Das River Embankment Breach: नेपाल की बारिश पर टिका है अमौर का मिजाज; कटाव की कमान तेज
अमौर प्रक्षेत्र की नदियों का विधिक मिजाज पूरी तरह से नेपाल की पहाड़ियों पर होने वाली मूसलाधार बारिश पर निर्भर करता है. हर वर्ष नेपाल में वर्षाकाल प्रारंभ होते ही सीमांचल की नदियां उफनाने और बौराने लगती हैं, और इस बार भी ठीक वैसा ही विसंगतिपूर्ण दृश्य संधारित हो रहा है.
नेपाल से आ रहे भारी इनपुट के कारण नदियों ने अपने तेवर बेहद तल्ख कर लिए हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में भीषण कटाव शुरू हो गया है. स्थानीय प्रभारियों और प्रबुद्ध समाज ने जिला कप्तानों व आपदा प्रबंधन विभाग से मांग की है कि प्रभावित प्रक्षेत्रों में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य (एसडीआरएफ की तैनाती) मुस्तैद किया जाए और कटे हुए बांध स्थल पर सैंड बैग (बालू की बोरियां) डालकर विधिक रूप से कटाव को नियंत्रित संधारित किया जाए.
