Cyber Crime: बिहार के पूर्णिया जिले में साइबर अपराधियों के हौसले पस्त करने और आम जनता की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित वापस दिलाने में जिला पुलिस की स्पेशल साइबर विंग लगातार तत्परता दिखा रही है. ताजा मामला के. नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (Cyber Crime) का शिकार हो गया था. ठगों ने झांसा देकर पीड़ित के खाते से ₹16,800 उड़ा लिए थे. लेकिन, घटना के तुरंत बाद पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर साइबर थाना पूर्णिया की टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करते हुए शुक्रवार, 6 जून 2026 को पूरी राशि पीड़ित के खाते में वापस क्रेडिट करवा दी.
डिफेंस कॉलोनी के रहने वाले हैं पीड़ित; शिकायत के बाद तुरंत फ्रीज कराया गया ट्रांजैक्शन
- पीड़ित की पहचान: साइबर ठगी का शिकार हुए व्यक्ति की पहचान बसंत कुमार (पिता- सुरेश दास) के रूप में हुई है. वे मूल रूप से के. नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत डिफेंस कॉलोनी, झील टोला रोड, रिकाबगंज (वार्ड संख्या-15) के निवासी हैं.
- त्वरित शिकायत का मिला फायदा: खाते से ₹16,800 कटने का मैसेज आने के तुरंत बाद बसंत कुमार ने बिना वक्त गंवाए सीधे साइबर थाना पूर्णिया पहुंचकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई.
- अकाउंट हुआ ट्रैक: शिकायत मिलते ही साइबर थाना के तकनीकी एक्सपर्ट्स और पुलिस पदाधिकारियों की टीम ने एक्टिव मोड में आकर उस गेटवे और बैंक खाते को चिन्हित किया, जहां पैसे ट्रांसफर किए गए थे. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उस संदिग्ध ट्रांजैक्शन को होल्ड (फ्रीज) करवा दिया, जिससे ठग पैसे की निकासी नहीं कर सके.
पूरी राशि पाकर पीड़ित ने जताया पुलिस का आभार; 6 जून को खाते में लौटे पैसे
पुलिस की कार्यशैली की सराहना: लगातार तकनीकी फॉलोअप और बैंक नोडल अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने के बाद, शुक्रवार (6 जून 2026) को कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही पीड़ित बसंत कुमार के बैंक खाते में ठगी गई शत-प्रतिशत राशि यानी ₹16,800 सुरक्षित वापस आ गई. अपनी डूबी हुई रकम को इतनी जल्दी वापस पाकर बसंत कुमार के चेहरे पर खुशी लौट आई और उन्होंने पूर्णिया साइबर थाना की कार्यप्रणाली, उनकी संवेदनशीलता और त्वरित रिपॉन्स के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है.
‘गोल्डन ऑवर’ में कॉल करना है बेहद जरूरी; पुलिस ने जारी की गाइडलाइन
इस सफल रिकवरी के बाद पूर्णिया पुलिस ने आम नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी सुरक्षा परामर्श (Cyber Security Advisory) जारी किया है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब भी कोई व्यक्ति ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, लॉटरी स्कैम, फर्जी लिंक या ओटीपी (OTP) शेयरिंग के कारण ठगी का शिकार होता है, तो घटना के बाद का पहला एक घंटा (Golden Hour) सबसे महत्वपूर्ण होता है.
यदि पीड़ित व्यक्ति ठगी होने के तुरंत बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर देता है या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करा देता है, तो अपराधियों के खातों को समय रहते ब्लॉक करना और पैसे रिफंड कराना 90% तक संभव हो जाता है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक पिन, पासवर्ड, सीवीवी (CVV) या क्रेडेंशियल्स साझा न करें और डिजिटल रूप से सतर्क रहें.
