Purnia Mahadev Mandi: पूर्णिया शहर के बाड़ीहाट मोहल्ले में स्थित महादेव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. घनी आबादी के बीच स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर सिर्फ स्थानीय लोगों ही नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले राहगीरों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है. मान्यता है कि यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक करने से मन को शांति मिलती है, संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यही वजह है कि सामान्य दिनों में भी सुबह और शाम मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ रहती है.
सुबह-शाम गूंजता है हर-हर महादेव का जयघोष
बाड़ीहाट मोहल्ले की मुख्य सड़क किनारे स्थित यह मंदिर पूरे दिन भक्तिमय माहौल से सराबोर रहता है. सुबह होते ही श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.
सावन, सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है.
दर्शन मात्र से मनोकामना पूरी होने की मान्यता
स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि बाड़ीहाट महादेव मंदिर में सच्चे मन से भगवान शिव के दर्शन करने और पूजा-अर्चना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बंद किस्मत के द्वार खुलते हैं.
इसी विश्वास के कारण न केवल बाड़ीहाट बल्कि शहर के अन्य इलाकों और आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से यहां पहुंचते हैं. कई भक्त प्रतिदिन जलाभिषेक करते हैं और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
मन्नत पूरी होने पर कराया जाता है रुद्राभिषेक
मंदिर से जुड़े बुजुर्गों के अनुसार, यहां वर्षों से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. मन्नत पूरी होने पर कई लोग विशेष पूजा-अर्चना, शिव स्तुति और रुद्राभिषेक का आयोजन कर भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
सावन के महीने में रुद्राभिषेक कराने वालों की संख्या सबसे अधिक रहती है. इस दौरान मंदिर में सुबह से देर शाम तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है.
Purnia Mahadev Mandi: धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जुड़ाव का भी केंद्र
बाड़ीहाट महादेव मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के धार्मिक और सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. यहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. यही कारण है कि यह मंदिर पूर्णिया शहर की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है.
इसे भी पढ़ें: सुपौल-दरभंगा NH कॉरिडोर को मिली मंजूरी, मिथिलांचल और सीमांचल के बीच बनेगा नया हाईवे, इन जिलों को होगा फायदा
इसे भी पढ़ें: 3936 करोड़ की लागत से खगड़िया-पूर्णिया हाईवे बनेगा फोरलेन, सिर्फ 2 घंटे में पूरा होगा सफर
