पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट
Short Circuit Fire Accident: बिहार के पूर्णिया जिला अंतर्गत अमौर प्रखंड में ग्रामीण इलाकों में जर्जर बिजली के तारों से होने वाले हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. अमौर प्रखंड की बकेनिया बरैली पंचायत (वार्ड संख्या-10) के घर कोला गांव में सोमवार की बीती रात करीब 11:00 बजे बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक एक घर में चिंगारी भड़क उठी. पछुआ हवा के झोंकों के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आस-पास के घरों को अपनी कड़क चपेट में ले लिया. इस अगलगी की भीषण घटना में अनवारुल, सालम और मैमून निशा के घर पूरी तरह जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए. इस अचानक आई आपदा से पीड़ित परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया है और वे खुले आसमान के नीचे आने को विवश हैं.
5 क्विंटल मकई जलकर कोयला; मवेशियों पर टूटा प्रकृति का कड़ा कहर
- अनाज की भारी क्षति: किसानों ने अपनी सालभर की मेहनत से उपजाकर घर में रखी लगभग 5 क्विंटल मकई (मक्का) को सुरक्षित रखने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटों ने उसे पूरी तरह जलाकर नष्ट कर दिया.
- बेजुबान मवेशियों का नुकसान: आग इतनी तेजी से फैली कि गोहाल (बथान) में बंधे पशुओं को निकालने का समय नहीं मिला. इस वजह से एक दुधारू गाय की मौके पर ही झुलसकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य गाएं बेहद गंभीर रूप से घायल (झुलस) गईं.
ग्रामीणों की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा; डॉक्टरों ने रात में ही किया इलाज
सराहनीय सामाजिक प्रयास: रात के सन्नाटे में जब आग की ऊंची लपटें आसमान छूने लगीं, तो सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण बाल्टियों में पानी और बालू लेकर दौड़ पड़े. ग्रामीणों ने कड़े सामूहिक प्रयास और भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे आग को वार्ड-10 के अन्य दर्जनों सघन घरों तक फैलने से रोक लिया गया, अन्यथा पूरा टोला जल जाता.
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए वेटनरी (पशुपालन) विभाग की टीम तुरंत एक्टिव हुई, जिसका प्रशासनिक विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
| मौके पर पहुंचे पशु चिकित्सक दल | घायल पशुओं की वर्तमान स्थिति | दी गई तात्कालिक चिकित्सा सहायता |
| * डॉ. अभिलाष (वेटनरी डॉक्टर) * अमित कुमार * शमसुल जोहा | 02 गाएं गंभीर रूप से झुलसी हुई, स्थिति नाजुक. | डॉक्टरों की टीम ने रात में ही एंटीबायोटिक इंजेक्शन और मरहम (दवाएं) दिए. |
चिकित्सकों ने पीड़ित पशुपालकों को कड़ा निर्देश दिया है कि झुलसे हुए मवेशियों को ठंडे और हवादार स्थान पर रखें तथा नियमित रूप से घाव की ड्रेसिंग करते रहें.
पीड़ित परिवारों ने लगाई सरकारी मुआवजे की गुहार:
इस अगलगी कांड के बाद पीड़ित अनवारुल और सालम के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव में मातम और गहरी सहानुभूति का माहौल है. प्रभावित ग्रामीणों ने अमौर के अंचल अधिकारी (CO) और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि:
- आपदा राहत कोष से सहायता: अग्निपीड़ितों को तत्काल प्रभाव से प्लास्टिक शीट (तिरपाल), सूखा राशन और आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली ₹11,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता और मवेशी की मौत का मुआवजा दिया जाए.
- बिजली विभाग पर कड़क कार्रवाई: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह हादसा बिजली विभाग की ढीली वायरिंग और तकनीकी लापरवाही के कारण हुआ है, अतः इसकी कड़ाई से जांच कर संबंधित कनीय अभियंता (JE) पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
