रात 2 बजे टीन शेड के घर पर गिरा ठनका, पूरे घर में फैला करंट
वज्रपात की पहली और बड़ी घटना अमौर प्रखंड क्षेत्र के आमगाछी पंचायत अंतर्गत गरहरा गांव (वार्ड नंबर 9) की है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात करीब 2:00 बजे गरहरा गांव निवासी रईस आलम का पूरा परिवार अपने टीन शेड वाले घर के दो अलग-अलग कमरों में सोया हुआ था. इसी दौरान भारी कड़कड़ाहट के साथ आसमानी बिजली सीधे उनके घर पर आ गिरी. वज्रपात का झटका इतना भीषण था कि कमरे में रखा भारी पलंग टूटकर बिखर गया और पूरे घर के ढांचे में हाई-वोल्टेज करंट फैल गया.
कंबल ओढ़े रहने से बची जान, कपड़ों में लग गई थी आग
परिजनों ने बताया कि घटना के वक्त भीषण कड़कड़ाहट को देखकर सभी लोग कंबल ओढ़कर सोए हुए थे. वज्रपात के कारण घर के भीतर कपड़ों और बिस्तरों में अचानक आग लग गई. गनीमत यह रही कि सभी पीड़ितों ने कंबल ओढ़ रखा था, जिसके कारण आग की लपटों का सीधा असर उनके शरीर पर नहीं पड़ा और एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया. यदि लोग कंबल नहीं ओढ़े होते, तो कई लोगों की जान जा सकती थी.
मेहमानी में आई बहन और गृहस्वामिनी बेहोश, बच्चे भी झुलसे
इस हादसे में रईस आलम की पत्नी रबेसुन खातून और हाटगाछी गांव से अपनी बहन के घर मेहमानी (रिश्तेदारी) में आई खुशबिना खातून गंभीर रूप से झुलस गईं. बिजली के तेज झटके और सदमे के कारण दोनों महिलाएं मौके पर ही बेहोश हो गईं. हालांकि, अस्पताल में इलाज के बाद सुबह उन्हें होश आ गया है, लेकिन वे अब भी बदहवासी की हालत में हैं और शरीर में तेज जलन की शिकायत कर रही हैं. इसके अलावा घर में सो रहे बच्चे भी इस आफत की चपेट में आकर झुलस गए, जिनमें साहुल आलम, राजीव आलम, लवली, नेहा, दिलशान और राहुल शामिल हैं.
दूसरी घटना: पक्के मकान में सो रहा दंपती भी हुआ शिकार
अमौर के ही परसराई (वार्ड नंबर 2) में वज्रपात की दूसरी घटना सामने आई. यहाँ अपने पक्के मकान के भीतर सो रही अरबीना और उनके पति लतीफ भी अचानक हुए जोरदार वज्रपात की चपेट में आ गए. ठनका की गूंज और तरंगों के कारण दंपती गंभीर रूप से झुलस गया. स्थानीय ग्रामीणों की मदद से इन्हें भी तुरंत रात में ही अमौर रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया.
सभी मरीज खतरे से बाहर, डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी: डॉ. श्याम
घटना के बाद आधी रात को ही अमौर रेफरल अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल रहा. अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. श्याम कुमार ने बताया कि रात में ही सभी 9 मरीजों को आपातकालीन (इमरजेंसी) वार्ड में लाया गया था. चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सभी का प्राथमिक उपचार किया और जीवन रक्षक दवाएं दीं. डॉक्टर के अनुसार, सुबह तक सभी मरीजों को पूरी तरह होश आ गया है और फिलहाल सभी की स्थिति खतरे से बाहर बनी हुई है. हालांकि, झुलसने के जख्मों और गहरे मानसिक सदमे (ट्रॉमा) को देखते हुए सभी पीड़ितों को अभी डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है.
अमौर (पूर्णिया) से सुनील कुमार की रिपोर्ट:
