Purnia News: पूर्णीया के अमौर में सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना का उद्देश्य गांवों की गलियों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों को रोशन करना है, लेकिन पूर्णिया के अमौर प्रखंड की बंगरा मेहंदीपुर पंचायत में यही योजना अब बदहाल नजर आ रही है. पंचायत के अलग-अलग वार्डों और प्रमुख स्थानों पर लगाई गई करीब 30 से 40 सोलर स्ट्रीट लाइटें पिछले दो महीने से बंद पड़ी हैं.
शाम होते ही पंचायत की कई सड़कें और गलियां अंधेरे में डूब जाती हैं. इससे रात में आने-जाने वाले ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है. खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अंधेरे रास्तों से गुजरने में डर और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत स्तर से खराब लाइटों की जानकारी संबंधित अधिकारियों और एजेंसी को दी जा चुकी है, तो दो महीने बाद भी इनकी मरम्मत क्यों नहीं हो सकी.
दो महीने से बंद हैं 30 से 40 सोलर लाइट
बंगरा मेहंदीपुर पंचायत के विभिन्न वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत सोलर लाइटें लगाई गई थीं. इनका उद्देश्य रात के समय गांव की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों को रोशन करना था.
लेकिन पंचायत के अनुसार करीब 30 से 40 लाइटें पिछले दो महीनों से काम नहीं कर रही हैं. दिन में इन लाइटों के पोल नजर आते हैं, लेकिन शाम होते ही इनके आसपास का इलाका फिर अंधेरे में बदल जाता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लाइटें लगने के बाद नियमित रखरखाव नहीं किया जाए, तो योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है.
मुख्य रास्तों और चौराहों पर बढ़ी परेशानी
स्ट्रीट लाइटें बंद होने का सीधा असर रात में होने वाले आवागमन पर पड़ा है. मुख्य रास्तों और गलियों में अंधेरा रहने के कारण लोगों को संभलकर चलना पड़ता है.
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार अंधेरे में सड़क पर बने गड्ढे या दूसरे अवरोध आसानी से दिखाई नहीं देते. इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
वहीं ग्रामीणों को असामाजिक तत्वों के कारण भी अप्रिय घटना की चिंता रहती है. अंधेरे वाले स्थानों पर सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ जाती है.
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत
रात में अंधेरी सड़क से गुजरना हर किसी के लिए मुश्किल है, लेकिन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी अधिक है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरी काम से शाम के बाद बाहर निकलने पर अंधेरे रास्तों से गुजरना पड़ता है. बुजुर्गों के लिए रास्ते की स्थिति देखना मुश्किल होता है, जबकि बच्चों और महिलाओं को सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है.
ग्रामीणों का कहना है कि सोलर स्ट्रीट लाइट लगने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि रात में गांव की सड़कें रोशन रहेंगी, लेकिन लगातार दो महीने से लाइटें बंद रहने से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
मुखिया बोले- कई बार दी जानकारी, फिर भी नहीं हुई मरम्मत
बंगरा मेहंदीपुर पंचायत के मुखिया अब्दुल कुद्दुस ने लाइटों के लंबे समय से बंद रहने पर गंभीर नाराजगी जताई है.
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत स्थापित लाइटों के खराब होने की जानकारी वरीय पदाधिकारियों और संबंधित कार्य एजेंसी को लगातार दी जा रही है.
मुखिया के अनुसार पंचायत स्तर से कई बार मौखिक सूचना दी गई. इसके अलावा विधिवत लिखित आवेदन भी सौंपा गया. इसके बावजूद दो महीने बीत जाने के बाद भी एक भी खराब लाइट की मरम्मत नहीं कराई गई है.
BPRO ने कहा- एजेंसी को दिया गया है निर्देश
मामले में बीपीआरओ नूतन कुमारी ने बताया कि जो भी स्ट्रीट लाइट खराब हैं, उनके संबंध में एजेंसी को जानकारी दी गई है.
उन्होंने कहा कि जल्द ही खराब लाइटों को ठीक करा दिया जाएगा.
अब ग्रामीणों की नजर इस आश्वासन पर है कि एजेंसी कब मौके पर पहुंचती है और बंद पड़ी लाइटों की मरम्मत कब तक पूरी होती है.
योजना पर खर्च के बाद रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाओं का महत्व केवल लाइट लगाने तक सीमित नहीं है. इनका नियमित रखरखाव और खराब होने पर समय पर मरम्मत होना भी उतना ही जरूरी है.
बंगरा मेहंदीपुर में दो महीने से 30 से 40 लाइटें बंद रहने का मामला इसी सवाल को सामने लाता है कि सरकारी योजनाओं की स्थापना के बाद उनकी निगरानी और रखरखाव कितनी प्रभावी तरीके से हो रहा है.
ग्रामीणों की मांग है कि केवल खराब लाइटों की मरम्मत ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्या होने पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए.
Purnia News: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की
मुखिया अब्दुल कुद्दुस सहित स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित वरीय पदाधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है.
ग्रामीण चाहते हैं कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत बंद पड़ी सभी 30 से 40 लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए, ताकि रात में गांव की सड़कें और सार्वजनिक स्थान फिर से रोशन हो सकें.
फिलहाल प्रशासन की ओर से जल्द मरम्मत का आश्वासन दिया गया है. अब असली परीक्षा इस बात की है कि दो महीने से बंद लाइटें कितनी जल्दी चालू होती हैं और क्या आगे इनके रखरखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है.
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