पूर्णिया के इस शिवालय में एक साथ होते हैं महादेव और मां काली के दर्शन

Aaj Ka Darshan : पूर्णिया का वो चमत्कारी शिवालय, जहां सूरज की पहली किरण करती है महादेव का अभिषेक

Aaj Ka Darshan : पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट. बिहार के पूर्णिया सिटी में सौरा नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक शिवाला इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. यहां भक्त एक साथ भगवान शिव और मां काली के दर्शन करते हैं. मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर सुबह सूरज की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है. ऐसा लगता है मानो स्वयं आदिदेव भगवान सूर्य महादेव का अभिषेक कर रहे हों. सावन में यहां का नजारा मिनी बाबाधाम जैसा दिखता है.

सौरा नदी किनारे बसता है आस्था का संसार

पूर्णिया सिटी से गुजरने वाली सौरा नदी के तट पर बना यह विशाल शिवाला दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. मंदिर से नदी तक बनी सीढ़ियों पर सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है. श्रद्धालु पहले नदी में स्नान करते हैं और फिर उसी जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

सूरज की पहली किरण बनती है भक्ति का अद्भुत दृश्य

करीब दो सौ साल पुराने इस शिवालय की बनावट बेहद अनोखी है. सूर्योदय के समय सूर्य की पहली किरण सौरा नदी के जल को छूते हुए सीधे शिवलिंग पर पड़ती है. इसकी रोशनी सामने स्थित मां काली मंदिर तक पहुंचती है. यह दृश्य इतना मनमोहक होता है कि सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग भी यहां रुक जाते हैं.

सावन में गूंजते हैं हर हर महादेव के जयकारे

महाशिवरात्रि और सावन के महीने में इस मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. सुबह से देर रात तक बोल बम और हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहते हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु और कांवरिये यहां पहुंचते हैं. पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.

मां काली मंदिर भी है श्रद्धा का बड़ा केंद्र

शिवालय के समीप स्थित मां काली का ऐतिहासिक मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले लोग यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं. अमावस्या के दिन यहां विशेष पूजा होती है, जिसमें दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं.

आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम

पूर्णिया का यह ऐतिहासिक स्थल सिर्फ पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की साझा संस्कृति और परंपरा की पहचान भी है. यही वजह है कि यहां हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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