एक दिन में 22 लोगों को सांप ने डंसा

जिले में सर्पदंश की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि, यह सिलसिला अप्रैल माह से ही बढ़ने लगा था और अभी हालात ऐसे हैं कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन औसतन लगभग 10 से लेकर 12 सर्पदंश के शिकार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.

हर दिन करीब दर्जन भर सर्पदंश के मामले पहुंच रहे जीएमसीएच

पूर्णिया. जिले में सर्पदंश की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि, यह सिलसिला अप्रैल माह से ही बढ़ने लगा था और अभी हालात ऐसे हैं कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन औसतन लगभग 10 से लेकर 12 सर्पदंश के शिकार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. इधर, बरसात के मौसम में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजर रहा है जब सर्प दंश का मरीज अस्पताल न पहुंचा हो. प्रतिदिन अमूमन मरीजों के आने का सिलसिला इधर लगातार चल रहा है जबकि किसी किसी दिन इसकी संख्या बढ़ भी जा रही है. अगर बीते माह जुलाई की बात करें तो एक दिन में इसके शिकार मरीज की संख्या 22 तक पहुंच गयी है जबकि इस माह यानी अगस्त के शुरू होते ही सर्पदंश के शिकार दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. हालांकि, इलाज के बाबत जीएमसीएच सहित जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एंटीवेनम इंजेक्शन की उपलब्धता पर्याप्त है जहां सभी का इलाज किया जाता है.

गेहूं पकने के समय से ही बढ़ने लगती है सर्पदंश की घटनाएं

ग्रामीण इलाकों में लोगों का कहना है कि स्नैक बाइट की समस्या गेहूं की कटनी का समय से ही बढ़ने लगती है. अक्सर गेहूं की परिपक्वता अवस्था के समय खेतों में चूहों की संख्या बढ़ने लगती है जिससे सांप भोजन की तलाश में उनके बिलों के आस पास डेरा डाल देते हैं और जब कोई भी उन तक पहुंचता है तो सर्पदंश का शिकार हो जाता है. दूसरी ओर बरसात के दिनों में लगातार बारिश और गर्मी की भी वजह से सांप अपने बिलों से निकलकर पुराने घरों, पेड़ों, बाग, बगीचों के साथ साथ गोहालों और गोयठे उपलों लकड़ी के पुराने ढेरों आदि में छिपे रहते हैं जिससे उनके द्वारा काट लिए जाने की घटना इन दिनों आम हैं. अस्पताल कर्मियों का यह भी कहना है कि प्रत्येक वर्ष इन मौसमों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं और अमूमन सितम्बर माह से इनकी रफ़्तार में कमी आती है.

लक्षण को देखते हुए निर्धारित की जाती है सुई और उसकी डोज़

सर्पदंश के मामलों में पीड़ित व्यक्ति के ऊपर जाहिर होने वाले लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सक एंटीवेनम सुई और उसकी संख्या का निर्धारण करते हैं. चिकित्सकों की मानें तो सर्पदंश के मामलों में मरीज की स्थिति और काटे गये सांप के जहर का असर देखते हुए डोज़ का निर्धारण किया जाता है. अमूमन सामान्य मामलों में 5 से 10 डोज़ की जरूरत पड़ती है लेकिन कई बार गंभीर स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए अधिक संख्या में सुई लगाने की जरुरत पड़ जाती है.

जीएमसीएच के बोलते आंकड़े

माह सर्पदंश के शिकार मरीजों की संख्या

मई – 188

जून – 334

जुलाई – 340

बोले सिविल सर्जन

सांप द्वारा काटे जाने के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी अस्पतालों में एंटीवेनम इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है. अन्य जंगली जानवरों द्वारा काटे जाने एवं सर्प दंश की स्थिति को लेकर सारी तैयारियां पूर्ण हैं. किसी भी मामले में गंभीरता की स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस की भी सुविधा उपलब्ध है ताकि मरीज को बेहतर उपचार के लिए जल्द से जल्द जिला मुख्यालय तक पहुंचाया जा सके. लोग किसी भी तरह के अंधविश्वास और झाड फूंक के चक्कर में न पड़ें ऐसे मामलों में जितनी जल्द मरीज को चिकित्सक के पास पहुंचाएंगे उसके बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी.

डॉ. प्रमोद कुमार कनौजिया, सिविल सर्जन

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Author: ARUN KUMAR

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