परेशानी का सबब बना सड़क किनारे कचरा उसमें सुलगती आग और धुएं का बवंडर

पूर्णिया : सड़क किनारे कचरों में सुलगती आग और इससे उठने वाले धुएं के बवंडर के कारण खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है. धुएं के गुबार से प्राणवायु भी अब जहरीली हो चली है पर प्रदूषण का सबब बने कचरों के प्रति पूरा सरकारी महकमा उदासीन है. यह अलग बात है कि […]

पूर्णिया : सड़क किनारे कचरों में सुलगती आग और इससे उठने वाले धुएं के बवंडर के कारण खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है. धुएं के गुबार से प्राणवायु भी अब जहरीली हो चली है पर प्रदूषण का सबब बने कचरों के प्रति पूरा सरकारी महकमा उदासीन है.

यह अलग बात है कि प्रदूषण का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है. आलम यह है कि यहां कचरे की ढेर पर ही पर्व और त्योहार मनाए जा रहे हैं. मौजूदा हालात से आम आदमी त्रस्त और पस्त है. इस समस्या के स्थायी निदान के लिए बारंबार उठायी जाने वाली मांग भी अनसूनी होकर रह गई है.
गौरतलब है कि शहर की मुख्य सड़कों के किनारे पिछले करीब एक साल से लगातार कचरों की डंपिंग की जा रही है. चाहे गुलाबबाग जीरोमाइल जाने वाली मुख्य सड़क हो या बायपास रोड अथवा सिटी होते हुए कसबा जाने वाली सड़क हो, उसके किनारे कई अलग-अलग जगहों पर डंप किया कचरा नजर आ जाएगा. अगर सिर्फ कचरा होता तो बरसात के मौसम में दुर्गंध झेलना पड़ता, पर यहां तो उस कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे धुएं का बड़ा बवंडर निकल कर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है.
कभी-कभी तो धुआं इतना घना होता है कि आस पास के इलाकों में धुंध छा जाता है और उसकी चपेट में आने पर खांसी होने लगती है. जानकारों की मानें तो इस कचरे में प्लास्टिक, पॉलीथिन, रद्दी और निजी अस्पतालों द्वारा निकाले गये मेडिकल के कचरे होते हैं, जिससे कार्बन डाई ऑक्साइड, डाई ऑक्सीन और फ्यूरान जैसी गैसें प्रतिदिन निकल रही हैं, जिसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है.
प्रदूषित हो रहा शहर का पूर्वी इलाका
शहर के पूर्वी हिस्से में बसी आबादी धुएं के इस बवंडर से सबसे ज्यादा प्रभावित है. इस इलाके में कप्तान पुल पर चढ़ते ही कचरों का टीला और उससी निकलता धुएं का बवंडर राहगीरों की सांसों से टकराता है. हालांकि स्वास्थ्य पर इसका दूरगामी असर पड़ता है पर तत्काल खांसी होने लगती है.
अगर कोई वृद्ध इसकी चपेट में आ गया तो धुएं से दम घुटने का भी डर बन जाता है. यह बड़ी विडम्बना है कि बगल से गुजरने वाली सौरा नदी भी इन कचरों के कारण प्रदूषण की चपेट में आ गई है. आम आदमी की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती. कचरा और धुआं का जाल शहर के मुहल्लों में भी फैला हुआ है. नागरिकों का कहना है कि मुहल्लों में कचरा का उठाव करने की बजाय उसे जमा कर जला दिया जाता है जिसका धुआं घरों में घुस कर लोगों का जीना दूभर कर देता है.

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