ठंड के मौसम में खतरे का संकेत दे रही स्मॉग के साथ कोहरे की धुंध

पूर्णिया : बदलते मौसम में स्मॉग धुंध के साथ कोहरे का मेल खतरा का संकेत दे रहा है. इससे न केवल पर्यावरण पर संकट के आसार नजर आ रहे हैं बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी गहराने लगी है. दोनों ही तरह से मानव जीवन पर खतरा मंडरा रहा है. यह अलग बात है कि इन […]

पूर्णिया : बदलते मौसम में स्मॉग धुंध के साथ कोहरे का मेल खतरा का संकेत दे रहा है. इससे न केवल पर्यावरण पर संकट के आसार नजर आ रहे हैं बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी गहराने लगी है. दोनों ही तरह से मानव जीवन पर खतरा मंडरा रहा है.

यह अलग बात है कि इन खतरों के बावजूद हमारे बीच प्रदूषण को लेकर जागरूकता दिखायी नहीं दे रही. कचरे में लगी आग से धुआं निकलते देख हम दूसरों को कोसते जरूर हैं पर जिम्मेदार विभाग और उसके अधिकारियों के घेराव के लिए सड़क पर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते.
गौरतलब है कि शहर से गुजरी सौरा नदी पर बने कप्तान पुल के आसपास पिछले कई महीनों से कचरे में लगी आग धुआं उगल रही है जिस पर अब तक अंकुश नहीं लगाया जा सका है. चूंकि अब ठंड का मौसम आ गया है इसलिए नदी के आस पास शाम के बाद कोहरा भी छाने लगा है. शहर में यही एक ऐसा स्थल है जहां डंप किये गये कचरों की आग से बड़े पैमाने पर निकलने वाला धुआं वातावरण को विषाक्त कर रहा है.
इस मौसम में बड़ी परेशानी यह हो रही है कि कप्तान पुल के समीप धुएं की धुंध के साथ कोहरा घुल मिल रहा है. इससे कप्तान पुल के आसपास का धुंध और गहरा हो जाता है. पर्यावरणविद बताते हैं कि इस तरह की धुंध से न केवल पर्यावरण में प्रदूषण की गति तेज हो जाती है बल्कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है और रोगों के फैलाव की संभावनाओं को बल मिलता है.
आम शहरवासियों की मानें तो धुएं और कोहरे की धुंध के कारण यहां ठंड के मौसम में दुर्घटना की संभावनाएं भी बढ़ गयी हैं. लोगों का कहना है कि ठंड के मौसम में नदी के अमीप होने के कारण कप्तानपुल के आस पास घना कोहरा छा जाता है. यहां पहले से ही धुएं की धुंध फैल रही है. ऐसे में यहां सामने कुछ भी दिखायी नहीं पड़ता.
धुंध के कारण सामने से आने वाली गाड़ी की लाइट तब नजर आती है जब दोनों वाहन आमनी-सामने आ जाते हैं. हालांकि धुंध के कारण वाहन की गति अक्सर धीमी हो जाती है पर यदि थोड़ी सी चूक हो जाए तो बड़ी घटना भी हो सकती है. यह अलग बात है कि अस्पतालों में वैसे मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है.
कचरे की आग और इससे निकलने वाली धुएं की धुंध ने लोगों का जीवन मुश्किल में डाल दिया है. इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है. इससे बचाव के लिए अब नागरिकों को खुद सड़क पर उतरना होगा क्योंकि इसके लिए अब जनांदोलन की जरूरत महसूस हो रही है.
मो. अफरोज, नागरिक
धुएं की धुंध से पर्यावरण प्रदूषण को लेकर प्रभात खबर द्वारा जागरूकता का प्रयास सराहनीय है. लगातार प्रयास के बाद भी प्रशासनिक महकमे की खामोशी आंदोलन की राह दिखा रही है. यह आंदोलन सोशल मीडिया से नहीं चल सकता. जागरूक लोगों को सड़क पर उतरने की हिम्मत जुटानी होगी.
अमित मिश्रा, नागरिक
जिस तरह धुआं से प्रदूषण फैल रहा है, लोग बीमार हो रहे हैं और सरकारी महकमा चुप्पी साधे हुए है, मुझे लगता है कि इस मामले को लेकर अब न्यायालय की शरण में जाना होगा. हमलोगों को इस पर विचार करना चाहिए और विधिसम्मत धाराओं के तहत एक आवेदन देना चाहिए.
संजय कुमार सिंह, अधिवक्ता
कहते हैं पर्यावरणविद
इस तरह की आग और इससे निकलने वाले धुएं से कार्बनडाइऑक्साइड, कार्बनमोनोक्साइड व मिथेन समेत चार खतरनाक गैसें निकलती हैं जो पर्यावरण के साथ मानव जीवन के लिए भी हानिकारक हैं. इसके निदान के लिए कचरों को कम्पोस्टिंग में बदलने की जरूरत है. इसके लिए नये टेक्नोलॉजी को एडाप्ट करना चाहिए.
डा. पारस नाथ, प्राचार्य, कृषि कालेज

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