Bihar News: नेपाल में भूकंप ने फिर एबार तबाही मचाई है. मंगलवार को बजुरा और बाझंग जिले में दोपहर को भूकंप का कहर दिखा जिसमें मौत से भी कोहराम मचा. वहीं भारत के भी कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. नेपाल से सटे बिहार के भी आधा दर्जन से अधिक जिलों में भूकंप का खतरा रहता है. जिन्हें भूकंप जोन पांच में रखा गया है. कोसी-सीमांचल क्षेत्र में खतरा अधिक रहता है.
नेपाल से सटे बिहार के इलाकों में खतरा
नेपाल से सटे बिहार के आधा दर्जन से अधिक जिलों पर भूकंप का सर्वाधिक खतरा है. इन क्षेत्रों में भूकंप बाद होने वाले नुकसान के भी ज्यादा होने की संभावना है. कोसी-सीमांचल क्षेत्र में ये खतरा अधिक है. इस लिहाज से पूर्णिया जिले को काफी संवेदनशील मानते हुए जोन पांच में रखा गया है. इन क्षेत्रों में नए भवनों के निर्माण में भूकंप के न्यूनतम मानंदडों के सख्ती से पालन करना जरूरी है ताकि कम से कम नुकसान से बचाया जा सके.
पूर्णिया जिले का बनमनखी प्रखंड सबसे सेंसेटिव
भारतीय मानक ब्यूरो के नवीनतम सिस्मिक जोन मानचित्र के अनुसार, पूर्णिया जिले का बनमनखी प्रखंड का लगभग एक तिहाई भाग भूकंप के दृष्टि से सिस्मिक जोन पांच एवं प्रखण्ड का शेष भाग सिस्मिक जोन चार में आता है. यह सबसे खतरनाक जोन माना गया है. जिलावासियों ने विगत कई भूकंपों को महसूस भी किया है.
भूकंप सुरक्षा सप्ताह मनाया गया
पूर्णिया में हाल में ही भूकंप सुरक्षा सप्ताह मनाया गया था. इस मौके पर अपर समाहर्ता ने कहा कि भूकंप से लोगों की मृत्यु नहीं होती परंतु भूकंप के कारण कमजोर संरचनाओं के गिरने से लोगों की मृत्यु एवं जान-माल की क्षति अवश्य होती है. साथ ही एक भय का वातावरण बना रहता है.
भूकंपरोधी मकान बनाना जरुरी
बता दें कि आपदा प्रबंधन के बदले परिदृश्य में भूकंपरोधी भवनों का निर्माण एवं पूर्व में निर्मित मकानों का रेट्रोफिटिंग (सुदृढीकरण) कर उन्हें भूकंपरोधी बनाया जाना एक सकारात्मक पहल है. इसके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि भूकंपरोधी भवनों के निर्माण के संदर्भ में जागरूक किया जाये.
Posted By: Thakur Shaktilochan
