Bihar Road Project: बिहार में कई सारे रोड प्रोजक्ट्स पर काम किए जा रहे हैं. जिलों के बीच रोड कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है. ऐसे में बिहार में भारत-नेपाल सीमा से सटे सात जिलों को जोड़ने वाली इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना का काम अब अपने अंतिम फेज में पहुंच गया है. परियोजना को लेकर 95 प्रतिशत से अधिक निर्माण पूरा हो चुका है.
परियोजना की क्या है लागत?
बिहार में पश्चिम चंपारण के मदनपुर से शुरू होकर किशनगंज के गलगलिया तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण केंद्रीय परियोजना का निर्माण करीब 5865 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. मई महीने तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य है.
परियोजना को लेकर क्या दिया गया आदेश?
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना के निर्माण कार्य को लेकर जानकारी ली और बचे हुए कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक निर्देश दिया. इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क परियोजना के तहत बिहार में लगभग 554 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाना है, जिसमें से अब तक 529 किलोमीटर से अधिक सड़क निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है.
क्या है परियोजना का मुख्य उद्देश्य?
परियोजना का मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा बल की चौकियों को सड़क मार्ग से जोड़ना और सीमावर्ती इलाकों में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करना है. सचिव ने कहा कि यह सड़क सीमा सुरक्षा बल की चौकियों तक तेज और सुगम पहुंच सुनिश्चित करेगी. साथ ही सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी.
इन जिलों को मिलेगा फायदा
परियोजना को लेकर 808 पुलिया और 129 पुल का निर्माण किया जा चुका है. बाकी के पुलिया और पुलों के स्ट्रक्चर का काम हो रहा है. यह सड़क पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों को आपस में जोड़ेगी. इसके बन जाने से सीमावर्ती इलाकों के लाखों लोगों को व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि उत्पादों के निर्बाध आवागमन के लिए एक सुगम, सुरक्षित और सीधा संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा.
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