पटना समेत विश्वभर में मनाया गया विश्व णमोकार महामंत्र दिवस

पटना सहित विश्व के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को ‘जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन’ के तत्वावधान में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. इस अवसर पर पटना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (कदमकुआं), मीठापुर दिगम्बर जैन मंदिर, गुरारा जैन मंदिर सहित अन्य जैन मंदिरों में सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया.

– विश्व णमोकार महामंत्र दिवस पर भक्तिमय रहा वातावरण

पटना सहित विश्व के विभिन्न हिस्सों में बुधवार को ‘जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन’ के तत्वावधान में विश्व णमोकार महामंत्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. इस अवसर पर पटना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (कदमकुआं), मीठापुर दिगम्बर जैन मंदिर, गुरारा जैन मंदिर सहित अन्य जैन मंदिरों में सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया गया. सुबह 8:01 बजे से 9:35 बजे तक चले इस मंत्र जाप में सैकड़ों श्रद्धालुओं महिलाओं और पुरुषों ने पूरे भक्ति भाव से हिस्सा लिया. खासतौर पर कदमकुआं मंदिर और मीठापुर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही. ………………

सामूहिक साधना में इन्होंने लिया भाग

इस पावन अवसर पर पटना की महापौर सीता साहू, विधायक अरुण सिन्हा, सुषमा साहू, विनोद पहाड़िया जैन सहित अनेक गण्यमान्य लोगों ने भी कदमकुआं मंदिर में उपस्थित होकर नवकार महामंत्र का जाप किया और सामूहिक साधना में भाग लिया.

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णमोकार मंत्र: जैन धर्म का सर्वश्रेष्ठ मंत्र

जैन समाज के वरिष्ठ सदस्य एम पी जैन ने बताया कि णमोकारमंत्र को जैन धर्म में सबसे पवित्र, प्रभावशाली और अनादि मूल मंत्र के रूप में जाना जाता है. इसे णमोकार मंत्र, नमस्कार मंत्र या पंच परमेष्ठि नमस्कार भी कहा जाता है. इस मंत्र को जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूल मंत्र माना जाता है. इस मंत्र में किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पांच महान आत्माओं अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु-का स्मरण और वंदन किया जाता है. यह मंत्र लौकिक और अलौकिक दोनों प्रकार के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. इसे लोकोत्तर मंत्र कहा गया है, जो आत्मिक शुद्धता, ध्यान, स्मरण और आत्मा के शुद्ध स्वरूप का साक्षात्कार कराता है. यह पापों का नाश करने वाला और जीवन में मंगल लाने वाला मंत्र माना जाता है. णमोकार

महामंत्र एक लोकोत्तर मंत्र है. इस मंत्र को जैन धर्म का परमपवित्र और अनादि मूल मंत्र माना जाता है. इसमें किसी व्यक्ति का नहीं अपितु संपूर्ण रूप से

विकसित और विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है. इसलिए यह अनादि और अक्षयस्वरूपी मंत्र है.अरिहंत

रूप परमात्मा के साथ साथ लोक के सर्व साधुओं का नमन इस मन्त्र को सर्वव्यापी बनाता है. इस महामंत्र को जैन धर्म में सबसे प्रभावशाली मंत्र माना

जाता है. ये पांच परमेष्ठी हैं. इन पवित्र आत्माओं को शुद्ध भावपूर्वक किया गया यह पंच नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है. संसार में सबसे उत्तम

मंगल है.

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