Virat Ramayan Mandir (सुबोध कुमार नंदन की रिपोर्ट) बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया (जानकीनगर) में निर्माणाधीन महात्वाकांक्षी ‘विराट रामायण मंदिर’ परियोजना के खाते में एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की विग्रह को तराशने वाले देश के प्रख्यात मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इस मंदिर के लिए भगवान नंदी की एक विशाल और भव्य प्रतिमा बनाने की आधिकारिक सहमति दे दी है. यह नंदी प्रतिमा लगभग 18 फीट ऊंची होगी, जिसे अगले 18 महीनों के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने इस संबंध में विशेष जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि देश के इतने बड़े और सिद्धहस्त मूर्तिकार अरुण योगीराज का इस भव्य परियोजना से जुड़ना पूरे बिहार और रामायण मंदिर के लिए अत्यंत गौरव की बात है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नंदी प्रतिमा की स्थापना के लिए जो स्थान निर्धारित किया गया है, केवल उसी हिस्से को छोड़कर मंदिर के बाकी सभी खंभों, शिखरों और दीवारों का निर्माण कार्य पूर्व की भांति बिना रुके लगातार जारी रहेगा.
केसरिया पहुंचे अरुण योगीराज, वास्तुकला और स्वरूप पर की चर्चा
इससे पहले शनिवार को मूर्तिकार अरुण योगीराज ने खुद पूर्वी चंपारण के केसरिया पहुंचकर निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर का सघन दौरा किया और साइट की प्रगति का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने न्यास समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों और इंजीनियरों के साथ बैठक की. इस बैठक में मंदिर की वास्तुकला, निर्माण की तकनीकी बारीकियों और बनने वाली नंदी प्रतिमा के दिव्य स्वरूप व मुद्रा पर विस्तृत और गहन चर्चा की गई.
गौरतलब है कि अरुण योगीराज ने ही अयोध्या में रामलला की विश्वप्रसिद्ध श्यामल प्रतिमा के अलावा नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य और विशाल प्रतिमा का निर्माण किया है, जिसकी सराहना पूरी दुनिया में हुई है.
जानिए विराट रामायण मंदिर की कुछ अद्भुत विशेषताएं:
- आकार और क्षेत्रफल: पद्मश्री किशोर कुणाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को कुल 120 एकड़ के विशाल भूभाग पर विकसित किया जा रहा है.
- ऊंचाई और भव्यता: पूर्ण होने पर इस मुख्य मंदिर की ऊंचाई 270 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी.
- शिखर और मंडप: मंदिर परिसर के भीतर कुल 22 छोटे-बड़े मंदिर होंगे और इसका भव्य ढांचा 12 गगनचुंबी शिखरों से सुसज्जित होगा.
- विशाल शिवलिंग: इस परिसर में 33 फीट ऊंचा काले ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित एक विशाल शिवलिंग पहले ही स्थापित किया जा चुका है, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र है.
2030 तक पूरा होगा निर्माण, हर दिन पहुंच रहे हजारों सैलानी
प्रबंधन के अनुसार, इस महामंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2030 तक पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है. हालांकि, निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद इस ऐतिहासिक संरचना को देखने के लिए अभी से ही देश-विदेश के पर्यटकों का आना शुरू हो गया है. वर्तमान में हर दिन करीब चार से पांच हजार श्रद्धालु और आम पर्यटक यहाँ दर्शन-पूजन और वास्तुकला को निहारने पहुंच रहे हैं. मंदिर प्रबंधन ने यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ‘सहस्त्रशिवलिंग मंडप’ में नियमित रूप से पूजा-अर्चना और आरती की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की है.
Also Read: गौरीचक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, संगीन मामले में दो फरार आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
