यूक्रेन में सामान छोड़ कोई पैदल, तो कोई ट्रेन से निकला बॉर्डर की ओर, दहशत में बिहारी छात्रों के माता-पिता

सीवान के नबीगंज के पड़ौली निवासी डॉ संजय सिंह की बेटी ऋचा खारकीव में रहती है. उसने बताया कि भारतीय छात्र की मौत के बाद वे लोग अपने रिस्क पर पश्चिमी यूक्रेन की तरफ निकल गये हैं.

सीवान. यूक्रेन के खारकीव और इसके आसपास के शहरों में फंसे भारतीय छात्रों का एक-एक दिन दहशत के साथ गुजर रहा है. पहले से ही कई परेशानियों से जूझ रहे छात्रों को जब यह सूचना मिली कि एक भारतीय छात्र की वहां गोली लगने से मौत हो गयी है, इसके बाद तो वहां हड़कंप मच गया. इसके तुरंत बाद दूतावास से संदेश जारी किया गया कि भारतीय छात्र तुरंत खारकीव छोड़ दें. ऐसे में कई छात्र सारे सामान वहीं छोड़ पैदल ही बॉर्डर की ओर निकल पड़े हैं.

कई छात्र ट्रेन मंगलवार को ट्रेन से निकले. हालात यह है कि यूक्रेन के कई शहरों में कर्फ्यू लग चुका है. देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिये गये हैं, इसके बावजूद बिहारी छात्र वहां से निकलने की हर कोशिश कर रहे हैं. सीवान के नबीगंज के पड़ौली निवासी डॉ संजय सिंह की बेटी ऋचा खारकीव में रहती है. उसने बताया कि भारतीय छात्र की मौत के बाद वे लोग अपने रिस्क पर पश्चिमी यूक्रेन की तरफ निकल गये हैं.

सभी खारकीव से दोपहर 3:30 बजे (भारतीय समय) ट्रेन से निकले हैं. वे लोग अभी पोलैंड के बॉर्डर पर बसे लवीव जा रहे हैं. वहां पहुंचने के बाद आगे देखा जायेगा. जगतपुर महुआरी गांव की मिल्की भी खारकीव छोड़ चुकी है. रूस से नजदीक होने के कारण खारकीव ज्यादा प्रभावित है. भगवानपुर हाट प्रखंड के हरेंद्र सिंह के बेटे प्रिंस कुमार भी मंगलवार की सुबह बस से रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला है. जारी जंग के बीच रास्ता बदल कर बस को ले जाया जा रहा है. इन सबके अलावा बिहार के कई छात्र अब भी यूक्रेन के कीव, खारकीव, लवीव, ओडेसा आदि शहरों में फंसे हैं.

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