बचपन में बीमारी से किशोरी के छोटे हुए पैर का हुआ इलाज

बचपन में गंभीर बीमारी की वजह से बच्चों में पैर छोटा या बड़ा हो जाता है. समय पर इलाज नहीं होने पर वयस्क होने पर पैर छोटा या बड़ा ही रह जाता है.

भविष्य में बड़ा होने पर किशोरी के दोनों पैर रहेंगे बराबर, छोटे पैर से किशोरी को मिली निजात

संवाददाता, पटना

बचपन में गंभीर बीमारी की वजह से बच्चों में पैर छोटा या बड़ा हो जाता है. समय पर इलाज नहीं होने पर वयस्क होने पर पैर छोटा या बड़ा ही रह जाता है. हालांकि, इसका इलाज संभव है. झारखंड में इस तकनीक से इलाज की सुविधा नहीं होने से वहां से 13 साल की किशोरी इलाज के लिए यहां महावीर कैंसर संस्थान आयी है, जहां सर्जरी करके और इंप्लांट लगा कर किशोरी का पैर ठीक किया गया. इससे भविष्य में बड़ा होने पर पैर छोटा रह जाने की शिकायत दूर हो जायेगी. किशोरी नॉन मेटास्टिक ओस्टियोसरकोमा ऑफ लेफ्ट डिस्टल फीमर नामक बीमारी से पीड़ित थी. इस बीमारी का नयी तकनीक से इलाज महंगा है. इसलिए कैंसर सोसाइटी ने पांच लाख रुपये और झारखंड के सीएम फंड से किशोरी को अनुदान प्राप्त हुआ था. इस इंप्लांट का खर्च करीब छह लाख रुपये है. दिल्ली या मुंबई में इस इंप्लांट का खर्च सात से आठ लाख रुपए आता है.

कैंसर संस्थान में पहली बार हुई सर्जरी : महावीर कैंसर संस्थान में पहली बार इस तरह की सर्जरी हुई है. यह सर्जरी बोन कैंसर विभाग के वरीय सर्जन डॉ सूर्य प्रकाश ने की है. इसके लिए स्पेशल टीटानियम इंप्लांट बाहर से तैयार करके मंगवाया गया. इंप्लांट लग जाने से भविष्य में किशोरी का दोनों पैर बराबर रहेंगे. इस स्पेशल इंप्लांट को एक्सपैंडेबल पेशेंट स्पेशफिक कस्टोमाइज्ड मेगाप्रोस्थोसिस के नाम से जाना जाता है. डॉ सूर्यप्रकाश के मुताबिक किशोरी के परिजन बायां पैर छोटा होने से परेशान थे. परिजन को किशोरी की बड़ी होने पर शादी को लेकर चिंता सता रही थी, जो इलाज के बाद दूर हो गयी.

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Published by: Durgesh kumar

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