बच्चों के लिए मांग के अनुसार लिट्रेचर तैयार करने की जरूरत

नेशनल काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज की ओर से पटना कॉलेज में रविवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया.

संवाददाता, पटना

नेशनल काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज की ओर से पटना कॉलेज में रविवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान का विषय बच्चों का लिटरेचर बनाना चुनौतियां और संभावनाएं रखा गया था. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार लेजिस्लेटिव काउंसिल के अफाक अहमद ने कहा कि साहित्य किसी भी देश की कल्चरल पहचान है. इसलिए बच्चों के लिए अच्छा साहित्य लिखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है. उन्होंने नेशनल उर्दू काउंसिल के डायरेक्टर डॉ. शम्स इकबाल की कोशिशों की तारीफ की और कहा कि काउंसिल बच्चों के लिटरेचर की अहमियत को ध्यान में रखकर काम कर रही है. कार्यक्रम में काउंसिल की ओर से पब्लिश किताबों का विमोचन भी किया गया. प्रोग्राम की शुरुआत में नेशनल उर्दू काउंसिल के डायरेक्टर डॉ. शम्स इकबाल ने बच्चों के लिट्रेचर की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि नयी पीढ़ी के लिए दिमागी ट्रेनिंग जरूरी है. उन्होंने कहा कि उर्दू में बच्चों के साहित्य का दायरा बढ़ाने की जरूरत है ताकि बच्चे अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपने अतीत से जुड़े रहें. हमें बच्चों के लिए ऐसा साहित्य बनाना होगा जो जानकारी देने वाला और मनोरंजक दोनों हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By DURGESH KUMAR

DURGESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >