परीक्षा माफिया ने 28.50 करोड़ की फिरौती वसूलने के लिए किया था बिल्डर को अगवा

पटना एयरपाेर्ट के निकासी गेट के समीप से पांच अप्रैल को बिल्डर श्रीकांत कुमार को 28.50 करोड़ वसूलने के लिए परीक्षा माफिया ने अगवा किया गया था.

संवाददाता, पटनापटना एयरपाेर्ट के निकासी गेट के समीप से पांच अप्रैल को बिल्डर श्रीकांत कुमार को 28.50 करोड़ वसूलने के लिए परीक्षा माफिया ने अगवा किया गया था. पैसों का विवाद परीक्षा माफिया मनीष कुमार व बिल्डर श्रीकांत कुमार के भाई अरुण कुमार के बीच चल रहा था. इसके बाद ही मनीष ने अपने सहयोगियों के साथ श्रीकांत को अगवा कर लिया, ताकि अरुण कुमार पर दबाव देकर पैसा वसूल की जा सके. अगवा करने में मनीष कुमार के साथ ही समस्तीपुर निवासी बबलू कुमार व भभुआ निवासी विकास कुमार शामिल थे. पुलिस ने चितकोहरा गोलंबर के पास से अपह्त श्रीकांत कुमार को सकुशल बरामद कर लिया और मनीष, बबलू और विकास को रविवार की शाम गिरफ्तार कर लिया. साथ ही इस घटना को अंजाम देने में उपयोग की गयी हैरियर कार को जब्त कर लिया गया है. यह कार मनीष के नाम पर रजिस्टर्ड है. मनीष को पत्रकार नगर थाने की पुलिस ने वर्ष 2017 में हुए पेपर लीक के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. बबलू शराब के मामले में जेल जा चुका है. बताया जाता है कि श्रीकांत के दिल्ली से इंडिगो के विमान 6 इ 2695 से पटना आने की जानकारी मनीष को मिल गयी थी. इसके बाद दो कार से एयरपोर्ट के निकास गेट पर थे. श्रीकांत पैदल ही निकास गेट से बाहर निकल रहे थे और इसी दौरान उन्हें मनीष, बबलू व विकास ने जबरन कार में बैठा लिया.

कंकड़बाग हाउसिंग कॉलोनी स्थित एक मकान में बनाया बंधक और की मारपीट

इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने श्रीकांत कुमार को विकास के कंकड़बाग हाउसिंग कॉलोनी स्थित घर पर ले जाकर बंधक बना लिया. साथ ही उनके साथ मारपीट भी की और पैसे वसूलने के लिए दबाव बनाया. इसी दौरान परिजनों की जब श्रीकांत से बात नहीं हुई तो वे परेशान हो गये. क्योंकि श्रीकांत का मोबाइल फोन ऑफ हो गया था. इसके बाद श्रीकांत की भतीजी रिंकी कुमारी ने एयरपोर्ट थाने की पुलिस को मामले को लेकर लिखित शिकायत दी और बताया कि परिजनों से 28.50 करोड़ की फिरौती मांगी गयी है. साथ ही श्रीकांत के क्रेडिट कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप व चेकबुक को भी उन लोगों द्वारा रखे जाने की जानकारी पुलिस को दी. इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और फिर सीसीटीवी कैमरा को खंगाला गया. इस दौरान हथियार के बल पर अपहरण की बात सामने नहीं आयी. पुलिस सीसीटीवी कैमरे और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर कंकड़बाग पहुंच गयी. लेकिन अपहरण करने वाले लोगों को भी शक हो गया और अपह्त श्रीकांत कुमार को कार से चितकोहरा ले जाया गया. लेकिन पुलिस लगातार इनके पीछे लगी थी और चितकोहरा के पास श्रीकांत कुमार को सकुशल बरामद कर लिया. साथ ही तीनों की गिरफ्तारी कर ली गयी. श्रीकांत का घर हनुमान नगर में है. वे मूल रूप से नालंदा के चिसौरा के खोखना गांव के रहने वाले हैं. हालांकि श्रीकांत व अरुण फिलहाल दिल्ली में रहते हैं.

फिल्म प्रोडक्शन के लिए 50 लाख देने की बात को किया स्वीकार

अपहरण में शामिल मनीष कुमार ने पुलिस के समक्ष पूछताछ में बताया कि उन्होंने अरुण कुमार को दो-तीन करोड़ दिया था. लेकिन बाद में 50 लाख देने की जानकारी दी और उसमें गारंटर के रूप में श्रीकांत के हाने की जानकारी दी. हालांकि 50 लाख देने का साक्ष्य इन लोगों ने पुलिस को उपलब्ध नहीं कराया. सिटी एसपी स्वीटी सहरावत ने बताया कि श्रीकांत के परिजनों ने 28.50 करोड़ फिरौती मांगने की लिखित जानकारी दी है. अभी तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि अरुण कुमार को मनीष कुमार ने 50 लाख रुपये फिल्म प्रोडक्शन के नाम पर दी थी और उसमें श्रीकांत कुमार गारंटर बने थे. इन लोगों ने कितने पैसे दिये और कितने की फिरौती मांगी गयी है, इस बिंदू पर भी जांच की जा रही है. इसमें और भी कोई शामिल था या नहीं, इस संबंध में भी छानबीन की जा रही है.

अरुण व मनीष काफी पहले से हैं आपस में परिचित

सूत्ररों का कहना है कि मनीष व अरुण काफी दिनों से आपस में परिचित हैं. अरुण एक ऑनलाइन परीक्षा सेंटर का संचालक भी है. इनकी कंपनी को बिहार में ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा कराने की जिम्मेदारी भी मिली है. सूत्रों का कहना है कि इन दोनों के बीच में 18 करोड़ रुपये के लेन-देन का विवाद है. अब पुलिस मामले में यह जांच कर रही है कि किस कारण से मनीष ने अरुण को 18 करोड़ दी थी. श्रीकांत भी पुलिस के समक्ष पैसों के विवाद को लेकर लगातार बयान बदल रहे थे.

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Published by: Kumar prabhat

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