पटना : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में सियासत तेज हो गयी है. लॉकडाउन के कारण सभा आयोजित करने पर प्रतिबंध को लेकर सोशल मीडिया के जरिये राजनीतिक दलों के नेताओं में अब जुबानी जंग होने लगी है. सत्तापक्ष और विपक्ष में आरोपों-प्रत्यारोपों का सिलसिला परवान चढ़ने लगा है. पहले आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा. इसके बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व राजद नेता तेजस्वी यादव ने हमला बोला. आरजेडी नेताओं के हमले को लेकर जेडीयू ने पलटवार करते हुए इसे राजद नेताओं की हताशा और निराशा करार दिया है.
जानकारी के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम सोशल मीडिया पर खुली चिट्ठी लिख कर तंज कसा. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ”आदरणीय मुख्यमंत्री जी, इस संकटकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था, गरीबों-श्रमिकों की वस्तुस्थिति जानने और राज्यवासियों की हौसला अफजाई करने विगत 84 दिन से आप घर से बाहर नहीं निकले हैं. आप ऐसा करनेवाले देश के अकेले CM हैं. अगर कोई डर है, तो आगे-आगे मैं आपके साथ चलूंगा. लेकिन, अब तो निकलिए.”
साथ ही तंज कसते हुए कहा है कि ”देशवासी कह रहे हैं कि बिहार के CM को डर लगता है. सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरूपयोग करते हुए आप प्रतिदिन घंटों अपने नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेन्स करते हैं, लेकिन आम जनता को आपने पूछा तक नहीं. क्वॉरेंटिन सेंटरो में आपने जनता की क्या दुर्गति की, यह किसी से छुपा नहीं है. अब तो जागिए.”
लालू प्रसाद यादव ने भी ट्वीट कर मुख्यमंत्री पर साधा था निशाना
मालूम हो कि इससे पहले आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने सोमवार को ट्वीट कर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा था. उन्होंने ट्वीट करके लिखा था कि ”बूझो तो जाने? किस प्रदेश का डरपोक मुख्यमंत्री विगत 83 दिन से घर से बाहर नहीं निकला है? कोरोना भले ना भागऽल, लेकिन ई मुकमंत्री जनता के बीच मंझधार में छोड़ के भाग गऽइल, ई रणछोर के हिसाब-किताब आवेवाला चुनाव में सब लोग मिल-जुल के लऽ.”
CM पर ओ छी टिप्पणी राजद के नेताओं की हताशा और निराशा : जेडीयू
आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री पर हमले के बाद जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर जारी कर पलटवार किया है. उन्होंने कहा है कि ”राजद के नेताओं को ये समझ में नहीं आता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव जी के बीच का एक बड़ा फर्क ये है कि कम-से-कम नीतीश कुमार जी जब चाहे बैठक करेंगे, फाइलें निबटाएं, घर से करें या घर से जब बाहर निकलना चाहें, निकल सकेंगे. और इसी दिशा में कैबिनेट की बैठक के लिए बाहर जायेंगे, तो इस पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी राजद के नेताओं की ओर से हो रही है.
साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें (आरजेडी को) एक फर्क समझ लेना चाहिए कि कम-से-कम नीतीश कुमार जी को जब भी बाहर निकलना चाहें या घर में बैठ कर फाइलें निबटाना चाहें, वो कर सकते हैं. लेकिन, लालू प्रसाद यादव जी को ये सौभाग्य हासिल नहीं है. कानून की बेरहम मार ने उनको इस काबिल ही नहीं छोड़ा है कि वो चाहे भी तो बाहर निकल सकें. इसलिए लॉकडाउन हो या नहीं हो, लालू जी की नियति तो कारावास के बंद कमरे में ही जीवन के जो दिन हैं, उनको व्यतीत करना है. इसलिए ऐसी टिप्पणियों के जरिये उनकी जो हताशा और बौखलाहट दिखती है, जनता सबकुछ समझने लगी है और इसीलिए ऐसी बयानों का संज्ञान लेने के लिए भी आज कोई तैयार नहीं है.
