पिता के साये के बिना भी नहीं टूटा हौसला, मां की प्रेरणा से बिहार के लाल ने UPSC में पाई सफलता

Success Story: पटना के गौरव कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में 338वां रैंक हासिल कर अपने परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है. पिता के निधन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और मां की प्रेरणा व अपनी मेहनत के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की.

Success Story: कड़ी मेहनत, मजबूत इरादे और मां की प्रेरणा के सहारे पटना के बेऊर जेल रोड इलाके के रहने वाले गौरव कुमार ने यूपीएससी की परीक्षा में 338वां स्थान हासिल कर अपने परिवार और पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है.

कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौरव ने कभी हार नहीं मानी. पिता के निधन के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और लगातार मेहनत करते रहे. उनकी इस सफलता की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला

गौरव कुमार के पिता स्वर्गीय अरविन्द्र कुमार घोष अब इस दुनिया में नहीं हैं. पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. लेकिन गौरव ने इस कठिन समय को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. परिवार की जिम्मेदारियों और भावनात्मक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे.

मां बनी सबसे बड़ी ताकत

गौरव की सफलता के पीछे उनकी मां सोनामती कुमारी का बहुत बड़ा योगदान है. पिता के नहीं रहने के बाद उन्होंने ही बेटे को हर कदम पर हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. जब भी गौरव निराश होते, उनकी मां उन्हें फिर से संभालतीं और हौसला देतीं. मां के इसी विश्वास और समर्थन ने गौरव को मुश्किल समय में भी मजबूत बनाए रखा.

कई वर्षों की मेहनत लाई रंग

बताया जाता है कि गौरव कुमार पिछले कई वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. पढ़ाई के प्रति उनका अनुशासन और समर्पण काबिले-तारीफ है. उन्होंने अपनी पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बना लिया था. लगातार मेहनत और धैर्य के साथ तैयारी करते रहे. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.

इलाके में खुशी का माहौल

गौरव कुमार का घर बेऊर जेल रोड, पाटलीपुत्र केंद्रीय विद्यालय के पीछे, शिवाजीनगर, पटना में है. उनकी सफलता की खबर मिलते ही पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों और परिचितों ने गौरव को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

परिवार के लोगों का कहना है कि गौरव की इस उपलब्धि में उनकी मां की मेहनत और त्याग की बड़ी भूमिका है. कठिन समय में भी उन्होंने बेटे का हौसला नहीं टूटने दिया. गौरव कुमार की कहानी यह सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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