महिला कॉलेजों में लैब असिस्टेंट की कमी, प्रैक्टिकल में परेशानी

पिछले कुछ वर्षों में महिला कॉलेजों में लैब असिस्टेंट के पद तो हैं लेकिन इसमें एक या फिर एक भी मौजूद नहीं हैं

संवाददाता, पटना नये सत्र की शुरुआत हो चुकी हैं. हर साल हजारों की संख्या में छात्राएं विभिन्न कॉलेजों में साइंस लेकर पढ़ाई करती हैं. साइंस में सबसे अहम थ्योरी के बाद प्रैक्टिकल होता है. प्रैक्टिकल के दौरान लैब असिस्टेंट की मदद से कक्षाएं होती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महिला कॉलेजों में लैब असिस्टेंट के पद तो हैं लेकिन इसमें एक या फिर एक भी मौजूद नहीं है. ऐसे में छात्राएं खुद से और टीचर की मदद से लैब में प्रैक्टिकल करती हैं. जेडी वीमेंस कॉलेज में इंटर की प्राचार्या प्रो मीरा कुमारी ने बताया कि कॉलेज में आउटसोर्सिंग से और एक से दो स्थायी लैब असिस्टेंट मौजूद हैं. बॉटनी, फिजिक्स और केमिस्ट्री में एक भी स्थायी लैब असिस्टेंट नहीं हैं, जबकि साइकोलॉजी और होम साइंस में एक-एक स्थायी लैब असिस्टेंट हैं. इमरजेंसी में आउटसोर्सिंग से बुलाकर प्रैक्टिकल कराया जाता है. श्रीअरविंद महिला कॉलेज में जूलॉजी, बॉटनी, फिजिक्स, केमेस्ट्री का प्रैक्टिकल छात्राएं टीचर्स की मदद से करती हैं. कॉलेज की प्राचार्य प्रो साधना सिंह ने बताया कि कॉलेज के पास इन विषयों में एक भी स्वीकृत पद नहीं है. कॉलेज की ओर लैब असिस्टेंट के लिए बात की गयी है. फिजिक्स, बॉटनी और जूलॉजी में टीचर्स है लेकिन केमिस्ट्री में अब टीचर्स भी नहीं हैं. गंगा देवी महिला कॉलेज में टीचर्स के सपोर्ट से लैब में प्रैक्टिकल करवाया जाता है. जूलॉजी और फिजिक्स में दो लैब असिस्टेंट के स्वीकृत पद हैं, और दोनों विषयों के लैब असिस्टेंट रिटायर हो चुके हैं. वहीं बॉटनी में एक और केमिस्ट्री में एक लैब असिस्टेंट थे, वे भी रिटायर हो गये हैं. कॉलेज प्रशासन ने बताया कि अभी लैब में लाइव प्रैक्टिकल देखने के लिए स्क्रीन लगायी गयी है, जिसमें छात्रआएं जीवों के और अंगों के डिसेक्शन को देख सकेंगी. मगध महिला कॉलेज में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलॉजी, बॉटनी के अलावा होम साइंस और साइकोलॉजी में लैब असिस्टेंट के स्वीकृत पद हैं. ऐसे में पिछले कुछ सालों से लैब असिस्टेंट से जुड़े कई पद खाली पड़े हुए हैं. कॉलेज प्रशासन ने बताया कि साल 2023 में पीयू की ओर से पिछले साल एक चिट्ठी मिली थी, जिसमें 9 लैब असिस्टेंट के लिए स्वीकृति मिली और किस एजेंसी से लेना है इसका जिक्र भी है. कॉलेज की ओर से सारी जानकारियां यूनिवर्सिटी को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है. टीचिंग और सपोर्टिंग स्टाफ से प्रैक्टिकल में मदद ली जाती है.

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Author: JUHI SMITA

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