स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी फटने से महिला की हालत गंभीर, फोर्ड हॉस्पिटल में इमरजेंसी सर्जरी से बची जान

Ford Hospital: पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने तीन माह की स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी फटने से गंभीर रूप से घायल एक महिला की इमरजेंसी सर्जरी कर जान बचाई. गर्भाशय फटने और पेट में लगभग दो लीटर रक्तस्राव के बावजूद विशेषज्ञ टीम ने समय रहते ऑपरेशन कर मरीज को बचा लिया.

Ford Hospital: जहानाबाद की 21 साल की मनु कुमारी (बदला हुआ नाम) की जान फोर्ड हॉस्पिटल, पटना के डॉक्टरों ने समय रहते इमरजेंसी सर्जरी कर बचा ली. महिला तीन माह की स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के फट जाने के बाद गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची थी. इस दौरान उसकी बच्चेदानी फट चुकी थी, पेट में करीब दो लीटर खून जमा हो गया था और हीमोग्लोबिन का स्तर भी काफी कम हो गया था.

स्थिति अत्यंत नाजुक होने के कारण तत्काल ऑपरेशन किया गया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी.सर्जरी फोर्ड हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति भारद्वाज, डॉ. अनिता तथा जनरल सर्जन डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने सफलतापूर्वक की.

डॉ. जागृति भारद्वाज ने बताया कि स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा स्थिति है, जो अधिकतर उन महिलाओं में देखने को मिलती है, जिनका पहला प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ हो. इसमें भ्रूण गर्भाशय के सामान्य स्थान पर विकसित होने के बजाय पिछले सी-सेक्शन के निशान (स्कार) में जाकर प्रत्यारोपित हो जाता है. समय पर पहचान नहीं होने पर गर्भाशय फट सकता है और अत्यधिक रक्तस्राव से मरीज की जान को खतरा हो सकता है.

उन्होंने सलाह दी कि सिजेरियन प्रसव का इतिहास रखने वाली महिलाएं गर्भधारण के शुरुआती चरण में ही अच्छी गुणवत्ता वाले अल्ट्रासाउंड की जांच कराएं और स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित परामर्श लें, ताकि ऐसी गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके.


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लेखक के बारे में

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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