रोशन आनंद का ऐलान- छात्र नेता एकजुट हुए तो हम भी गर्दनीबाग पहुंचेंगे, बोले- छात्रों के लिए 6 केस झेल चुका हूं

बिहार स्टूडेंट प्रोटेस्ट

शिक्षा और रोजगार से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर गर्दनीबाग में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच, ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रोशन आनंद ने छात्र नेताओं से व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील की है. उनका मानना है कि एकजुटता से ही सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है.

Bihar student Protest : पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर शिक्षा और रोजगार से जुड़ी अलग-अलग मांगों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच अब एकजुटता की अपील उठने लगी है. छात्रों के अलग-अलग मंचों और टेंट में चल रहे धरनों को लेकर शिक्षक एवं ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रोशन आनंद ने छात्र नेताओं से व्यक्तिगत मतभेद छोड़कर एक मंच पर आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर छात्र और छात्र नेता एकजुट होकर अपनी मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे, तभी आंदोलन का असर दिखेगा.

"छात्र नेता व्यक्तिगत दुश्मनी छोड़कर एक मंच पर आएं"

रोशन आनंद ने कहा कि छात्र नेताओं को अपने व्यक्तिगत मतभेद पीछे छोड़कर छात्र हित के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए. उनका कहना है कि अलग-अलग टेंट में आंदोलन होने से छात्र भी भ्रमित होते हैं कि किस आंदोलन में शामिल हों और किसमें नहीं.

उन्होंने कहा कि सभी छात्र नेताओं को एक मंच पर आकर अपनी जायज मांगों को मजबूती और संवैधानिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना चाहिए.

"एकजुट नहीं हुए तो हर कोई आंदोलन का लाभ उठाएगा"

रोशन आनंद ने कहा कि अगर छात्र नेता एकजुट नहीं होते हैं तो इसका फायदा दूसरे लोग उठा सकते हैं. उन्होंने छात्रों से भी अपील की कि आंदोलन में किसी तरह की साजिश या व्यक्तिगत विवाद को जगह नहीं दी जानी चाहिए.

उनके मुताबिक छात्रों की मांग जायज है तो उसे पुरजोर तरीके से उठाना चाहिए, लेकिन आंदोलन का रास्ता संवैधानिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए.

TRE-4 से PhD तक अलग-अलग मुद्दों पर धरना

गर्दनीबाग में इस समय BPSC TRE-4 में एकल परीक्षा की मांग, BPSC 17वीं परीक्षा रद्द करने, BSSC में वैकेंसी, लाइब्रेरियन बहाली और PhD होल्डर्स की मांगों को लेकर अलग-अलग आंदोलन चल रहे हैं.

PhD होल्डर्स की मांगों को लेकर कुमुद पटेल आमरण अनशन पर भी बैठे हैं. आंदोलनकारियों के अनुसार उनके अनशन का 18वां दिन चल रहा है.

"सरकार को छात्रों से संवाद करना चाहिए"

रोशन आनंद ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद से निकलता है. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सरकार और छात्रों के बीच बातचीत होती है तो समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है.

उन्होंने बिहार सरकार से भी आग्रह किया कि गर्दनीबाग में आंदोलन कर रहे छात्रों से संवाद किया जाए और उनकी मांगों को सुना जाए.

"छात्र देश का भविष्य हैं, उनकी समस्या का समाधान जरूरी"

उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत कर समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए.

"छात्र नेता एकजुट होंगे तो हम भी गर्दनीबाग पहुंचेंगे"

रोशन आनंद ने आंदोलनरत छात्रों और छात्र नेताओं को स्पष्ट समर्थन देते हुए कहा कि अगर छात्र नेता एकजुट होकर एक मंच पर आते हैं तो वह भी गर्दनीबाग पहुंचकर उनके आंदोलन में शामिल होंगे.

उन्होंने कहा कि वह पहले भी छात्र हित के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे.

"छात्र हित में आवाज उठाने को लेकर छह केस हैं"

रोशन आनंद ने कहा कि छात्र हित में आवाज उठाने के कारण उनके ऊपर छह मामले दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के लिए आवाज उठाने के दौरान एक और मामला भी दर्ज हो जाए तो उन्हें इसकी चिंता नहीं है.

उनका कहना है कि उनकी पहचान छात्रों से बनी है और छात्र हित के लिए वह आगे भी आवाज उठाते रहेंगे.

अब एक मंच पर आने की चुनौती

गर्दनीबाग में अलग-अलग मांगों को लेकर चल रहे आंदोलनों के बीच रोशन आनंद की अपील ने छात्र संगठनों की एकजुटता पर बहस तेज कर दी है. अब देखना होगा कि TRE-4, BPSC 17वीं, BSSC, लाइब्रेरियन और PhD अभ्यर्थियों के आंदोलन से जुड़े छात्र संगठन क्या एक मंच पर आते हैं और क्या सरकार के साथ सामूहिक संवाद की दिशा में कोई पहल होती है.


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By विवेक सिंह

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