Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर के झगड़े अब सड़कों पर आ गई है. पार्टी के कद्दावर नेता और विधायक भाई वीरेंद्र के हालिया बयान ने संगठन के भीतर सुलग रही चिंगारी को हवा दे दी है. उन्होंने नेतृत्व पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में टिकटों का गलत वितरण ही हार का मुख्य कारण बना. उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपने वफादार और स्थानीय मजबूत चेहरों को दरकिनार कर बाहरी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया.
भाई विरेंद्र ने जताई नाराजगी
भाई वीरेंद्र की नाराजगी दिनारा विधानसभा सीट के उम्मीदवार चयन पर रही. उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक यादव प्रत्याशी को ही मैदान में उतारना था, तो सिटिंग विधायक विजय मंडल का टिकट क्यों काटा गया? उन्होंने विजय मंडल का पक्ष लेते हुए कहा कि वे एक सक्षम और अनुभवी नेता थे, फिर भी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. विधायक ने यह खुलासा भी किया कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के सामने विजय मंडल की पैरवी की थी, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया.
कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा
भाई वीरेंद्र ने कहा कि राजद में कुछ नेता केवल नाम के समाजवादी रह गए हैं. ये एक साथ कई जिलों की राजनीति को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं. ऐसे नेताओं की सिफारिशों पर टिकट बांटने की परंपरा ने समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा है. उन्होंने संगठन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर चंद नेताओं के इशारे पर फैसले लिए जाएंगे, तब तक पार्टी का प्रदर्शन नहीं सुधर सकता.
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बीजेपी ने तेजस्वी पर साधा निशाना
भाई वीरेंद्र के इस बयान ने सत्ताधारी भाजपा को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है. भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने भाई वीरेंद्र के बहाने तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव अक्सर अपनी हार का ठीकरा ईवीएम या चुनाव आयोग पर फोड़ते हैं, लेकिन अब उनके अपने ही विधायक सच्चाई बयां कर रहे हैं. भाजपा का तर्क है कि राजद के भीतर की यह कलह साबित करती है कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय कुछ खास लोगों की पसंद-नापसंद पर चल रही है. विपक्षी दल अब इस मुद्दे को तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल के रूप में पेश कर रहे हैं.
मौजूदा स्थिति तेजस्वी यादव के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है. एक तरफ उन्हें परिवार और पार्टी को एकजुट रखना है, तो दूसरी तरफ अनुभवी नेताओं के असंतोष को शांत करना है. भाई वीरेंद्र का यह बयान महज एक व्यक्ति की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग की भावना भी हो सकती है.
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