Patna News: पुनपुन नदी में लगातार हो रही जलस्तर की वृद्धि से पुनपुन प्रखंड के निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के श्रीपालपुर स्थित गेज स्टेशन पर सोमवार को दोपहर एक बजे नदी का जलस्तर 51.390 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (50.60 मीटर) से 79 सेंटीमीटर अधिक था. शाम छह बजे तक पानी का दबाव और बढ़ा तथा जलस्तर 51.510 मीटर पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 91 सेंटीमीटर ऊपर है. नदी के जलस्तर में प्रति घंटे औसतन दो सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की जा रही है.
केंद्रीय जल आयोग की टीम रख रही 24 घंटे निगरानी
केंद्रीय जल आयोग के श्रीपालपुर स्थित गेज मापक कर्मी मुन्ना कुमार ने बताया कि नदी के उपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश के कारण जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी है. आयोग की तकनीकी टीम 24 घंटे जलस्तर के आंकड़ों की निगरानी कर रही है. शनिवार की शाम से शुरू हुई जलस्तर वृद्धि के बाद रविवार की शाम तक नदी खतरे के निशान से छह सेंटीमीटर नीचे बह रही थी, लेकिन देर रात यह लाल निशान को पार कर गई. यदि पानी बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो प्रखंड के निचले इलाकों और तटीय खेतों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल सकता है.
दरधा नदी में पानी आने से खिले किसानों के चेहरे
एक तरफ जहां पुनपुन नदी के उफान से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, वहीं दूसरी तरफ धनरूआ प्रखंड स्थित दरधा नदी में पानी आने से स्थानीय किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए धनरूआ के लवाईच बराज के गेट को बंद कर दिया गया है.
बराज से निकली नहरों से धान की फसलों को संजीवनी
लवाईच बराज के फाटक बंद किए जाने से जलस्तर ऊपर उठा है और नहरों के माध्यम से धनरूआ प्रखंड की विभिन्न पंचायतों— कोसुत, मोरियावां, सांडा और सतपरसा के खेतों तक निर्बाध रूप से पानी पहुंचने लगा है. रोहिणी व आद्रा नक्षत्र के बाद खेतों में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों को धान की फसल के लिए यह पानी संजीवनी साबित हो रहा है.
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