संवाददाता, पटना
पटना विश्वविद्यालय में यूजीसी संपोषित सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोशल इंक्लुजन की ओर से नयी शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत लागू पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी देने के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम में विद्यार्थियों को सामाजिक परिवर्तन के मूल तत्वों से अवगत कराया. इस अवसर पर दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ रमेंद्र ने सामाजिक परिवर्तन के विषय पर प्रतिभागियों से संवाद किया.डॉ रमेंद्र ने बताया कि सामाजिक परिवर्तन का आशय समाज के भीतर सामाजिक संस्थाओं, सामाजिक व्यवहारों या सामाजिक संबंधों में घटित होनेवाले परिवर्तन से है. यह एक सार्वभौमिक और सतत प्रक्रिया है, जिसमें समाज की संरचना में परिवर्तन शामिल है. यह जनसांख्यिकीय, तकनीकी, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों सहित विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है और जब ऐसे प्रभाव बड़े पैमाने पर घटित होते हैं तो इससे सामाजिक परिवर्तन संभव हो जाता है. इस अवसर पर बीएन कॉलेज में दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ मो जियाउल हसन ने पुष्पगुच्छ एवं शॉल देकर डॉ रमेंद्र का स्वागत किया.
डॉ रमेंद्र पर छात्र जीवन से ही लोकनायक जयप्रकाश नारायण का प्रभाव रहा है और वे संप्रति बुद्धिवादी फाउंडेशन में सक्रिय हैं. प्रथम सत्र में डॉ मो जियाउल हसन ने प्रतिभागियों को बताया कि सरलतम अर्थों में पहले की स्थिति और आज की स्थिति में आ जाने वाला अंतर या बदलाव ही सामाजिक परिवर्तन कहलाता है. ऐसे परिवर्तनों का प्रभाव सामाजिक संगठन में, सामाजिक ढांचे या सामाजिक संबंधों पर या समाज के रहन-सहन के ढंग, रीति-रिवाजों और विश्वासों आदि में दृष्टिगोचर होता है. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने संपूर्ण क्रांति की अवधारणा पर विचार रखे. कार्यक्रम में बीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ राजकिशोर प्रसाद, इसी महाविद्यालय के फंक्शनल इंग्लिश के समन्वयक व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डीएन सिन्हा, डॉ मिथिलेश कुमार झा शामिल हुए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
