PMCH Outsourcing Workers Strike : पटना के पीएमसीएच में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल का असर अब मरीजों के इलाज पर साफ दिखाई देने लगा है. हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को इमरजेंसी से लेकर विभिन्न वार्डों तक मरीजों को बेडशीट उपलब्ध नहीं हो सकी. कई मरीजों को बिना चादर के ही बेड पर भर्ती करना पड़ा, जबकि कुछ परिजनों ने बाहर से चादर खरीदकर मरीजों के लिए व्यवस्था की.
Patna News : बिना चादर के भर्ती हुए मरीज, परिजन खुद करने लगे इंतजाम
वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों ने बताया कि अस्पताल की ओर से बेडशीट नहीं मिलने के कारण मरीजों को सीधे बेड पर लिटाया जा रहा है. कई परिजन बाजार से चादर खरीदकर लाए, जबकि कुछ लोग अस्पताल के स्टोर से सरकारी चादर मांगते नजर आए.
आयुष्मान योजना के मरीज भी हुए परेशान
हड़ताल का असर आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों पर भी पड़ा. दवा वितरण और आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की प्रक्रिया प्रभावित होने से नए मरीजों को मुफ्त दवाएं नहीं मिल सकीं. पुराने मरीजों को किसी तरह दवा उपलब्ध कराई गई, लेकिन कई मरीजों को घंटों भटकना पड़ा.
अधीक्षक के आश्वासन के बाद भी नहीं माने कर्मी
बकाया वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों को समझाने के लिए पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे. उन्होंने संबंधित एजेंसी को भुगतान कराने का आश्वासन दिया, लेकिन कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी लिखित आश्वासन नहीं देंगे, तब तक हड़ताल जारी रहेगी. बाद में परिसर से हटाए जाने पर प्रदर्शनकारी गंगा पाथवे पर धरने पर बैठ गए.
छह माह से वेतन नहीं मिलने का आरोप
आंदोलन कर रहे कर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है. साथ ही 11 हजार रुपये मासिक वेतन के स्थान पर केवल 8 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं. इसी को लेकर सभी कर्मचारी काम बंद कर आंदोलन कर रहे हैं.
350 से अधिक कर्मियों के जिम्मे है अहम व्यवस्था
पीएमसीएच में फ्रंट लाइन एजेंसी के माध्यम से 350 से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मी कार्यरत हैं. इनकी जिम्मेदारी मरीजों को भर्ती कराना, वार्डों में बेडशीट उपलब्ध कराना, आयुष्मान योजना से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराना, मुफ्त दवा उपलब्ध कराना तथा सर्जरी से जुड़ी प्रक्रियाओं का समन्वय करना है. हड़ताल के कारण ये सभी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं.
