जेल से बाहर आते ही बोले पीयू छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर, जेल के खाने में सुधार की जरूरत, सभी छात्रों की जल्द हो रिहाई

Bihar Students Protest: पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर जेल से रिहा होने के बाद जेल प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं. उन्होंने जेल के खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाया और अपने साथियों की तत्काल रिहाई की मांग की है.

Bihar Students Protest: जेल से रिहा होने के बाद पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर ने जेल प्रशासन और सरकार से कई मांगें उठाईं. उन्होंने कहा कि जेल के खाने की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है, क्योंकि वहां का भोजन अच्छा नहीं है. साथ ही उन्होंने अपने सभी साथियों और जेल में बंद छात्रों को जल्द से जल्द रिहा करने की मांग की.

छात्र सुरक्षित, गुंडागर्दी नहीं हुई

जेल के अंदर छात्रों के साथ व्यवहार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ किसी प्रकार की गुंडागर्दी नहीं हुई है. हालांकि सभी छात्रों को अलग-अलग सेल में रखा गया था. उन्होंने बताया कि कई सेल में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी मौजूद थे, लेकिन उनके सभी साथी सुरक्षित हैं.

साथियों की रिहाई के लिए उठाई आवाज

शांतनु शेखर ने कहा कि उनके सभी साथी अभी भी जेल में बंद हैं और उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी रिहाई सुनिश्चित करनी चाहिए.

सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई की मांग

शांतनु शेखर ने कहा कि जेल में ऐसे कई कैदी हैं, जिनकी सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है. उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे कैदियों को भी जल्द से जल्द रिहा किया जाए.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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