Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट)
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में डॉक्टरों की कमी के कारण पीजी (PG) की पढ़ाई पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है. विभाग में आवश्यक संख्या में सीनियर फैकल्टी नहीं होने से न केवल शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि इलाज पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
NMC गाइडलाइन से कम स्टाफ, PG छात्रों के भरोसे चल रहा विभाग
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइन के अनुसार प्लास्टिक सर्जरी विभाग में एक प्रोफेसर, तीन एसोसिएट प्रोफेसर, चार असिस्टेंट प्रोफेसर और चार सीनियर रेजिडेंट होना अनिवार्य है. लेकिन वर्तमान में विभाग में केवल एक प्रोफेसर, कुछ एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर और सीमित सीनियर रेजिडेंट ही कार्यरत हैं. बाकी काम का बोझ पीजी छात्रों पर है.
11 सीनियर डॉक्टर्स की जगह सिर्फ 5, बढ़ा दबाव
नियमों के अनुसार विभाग में कुल 11 सीनियर डॉक्टरों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल पांच ही मौजूद हैं. इस कमी के कारण मरीजों के इलाज और शैक्षणिक प्रशिक्षण दोनों पर दबाव बढ़ गया है.
रोज 50 से 70 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग में रोजाना 50 से 70 मरीज इलाज के लिए आते हैं. इनमें अधिकतर बर्न और दुर्घटना से जुड़े गंभीर मामले होते हैं, जिनका इलाज जटिल सर्जरी के जरिए किया जाता है.
सेवानिवृत्ति से और बढ़ेगी समस्या
सूत्रों के अनुसार विभाग के एक प्रोफेसर 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है. इससे शैक्षणिक और मेडिकल सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है.
1964 से चल रही है पीजी की पढ़ाई, देशभर से आते हैं छात्र
PMCH का प्लास्टिक सर्जरी विभाग 1961 में स्थापित हुआ था और 1964 में इसे पीजी कोर्स की मान्यता मिली थी. तब से यहां यूपी, दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं.
NMC फटकार का खतरा, प्रशासन चिंतित
PMCH प्रिंसिपल डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि यदि विभाग NMC की गाइडलाइन का पालन नहीं करता है, तो फटकार या कार्रवाई की संभावना बनी रहती है. ऐसे में स्टाफ की कमी को जल्द पूरा करना जरूरी है.
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