पटना से सुबोध कुमार नंदन की रिपोर्ट
Patna News: भगवान महावीर स्वामी की निर्वाणस्थली श्री पावापुरी जी सिद्धक्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अनूठी पहल शुरू की गई है. बिहार स्टेट दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी ने दर्शन से पहले आगंतुकों को भगवान महावीर के जीवन और जैन धर्म के सिद्धांतों से परिचित कराने की व्यवस्था की है.
इसके तहत धर्मशाला परिसर स्थित राजा सिद्धार्थ सभामंडपम में बड़े एलईडी स्क्रीन और आधुनिक ऑडियो सिस्टम लगाए गए हैं, जहां भगवान महावीर स्वामी के जीवन, उपदेशों और जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित परिचयात्मक वीडियो दिखाया जाता है.
स्कूली बच्चों और गैर-जैन श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
मंदिर दर्शन से पहले स्कूल के विद्यार्थियों सहित सभी गैर-जैन आगंतुकों को यह वीडियो दिखाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को जैन धर्म और भगवान महावीर के जीवन दर्शन की सरल एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है.
कमिटी के अनुसार, पावापुरी आने वाले कई पर्यटकों और विद्यार्थियों को पहले जैन धर्म की परंपराओं और भगवान महावीर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती थी.
भ्रम दूर करने के लिए शुरू की गई पहल
बिहार स्टेट दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी के अनुसार, कई बार जानकारी के अभाव में बच्चे भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को भगवान बुद्ध की प्रतिमा समझ लेते थे. इसी भ्रम को दूर करने और जैन धर्म की सही जानकारी देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की गई.
वीडियो के जरिए समझ रहे जैन धर्म के सिद्धांत
करीब एक वर्ष से संचालित इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. वीडियो के माध्यम से श्रद्धालु भगवान महावीर के जीवन दर्शन, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांतों को आसान भाषा में समझ रहे हैं.
इससे लोगों में जैन संस्कृति, परंपराओं और पावापुरी के आध्यात्मिक महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ रही है.
ज्ञान और भक्ति का हो रहा समन्वय
कमिटी का मानना है कि यह पहल केवल धार्मिक जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा का भी प्रभावी माध्यम बन रही है. दर्शन से पहले मिलने वाली जानकारी श्रद्धालुओं को पावापुरी सिद्धक्षेत्र के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है.
देशभर के जैन तीर्थों के लिए बन सकती है प्रेरणा
बिहार स्टेट दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी के मानद मंत्री पराग जैन ने बताया कि ज्ञान और भक्ति के समन्वय वाली इस पहल को देशभर में सराहना मिल रही है.
उन्होंने कहा कि पावापुरी सिद्धक्षेत्र में शुरू की गई यह व्यवस्था अपने तरह की पहली पहल है, जो आने वाले समय में अन्य जैन तीर्थस्थलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है.
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