सड़क हादसों में कैसे बचाई जाए जान? IGIMS में डॉक्टरों को मिला विशेष प्रशिक्षण

Patna News: आईजीआईएमएस में 17वें एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रॉमा मरीजों के त्वरित और वैज्ञानिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया. विशेषज्ञों ने “गोल्डन ऑवर” में सही इलाज को जीवनरक्षक बताते हुए नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया.

Patna News (सुबोध कुमार नंदन) इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में 17वें उन्नत ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (ATLS) प्रदाता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ट्रॉमा मरीजों के प्रारंभिक मूल्यांकन, त्वरित उपचार और प्रभावी प्रबंधन से जुड़े ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल को मजबूत करना था. यह प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एटीएलएस प्रोटोकॉल पर आधारित था.

सिमुलेशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान संवादात्मक व्याख्यान, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, सिमुलेशन आधारित अभ्यास और व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए. इसमें आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय क्षमता और व्यवस्थित ट्रॉमा देखभाल पर विशेष बल दिया गया.

विशेषज्ञों ने बताया प्रशिक्षण का महत्व

कोर्स निदेशक डॉ. बुधदेव चौधरी ने कहा कि संरचित ट्रॉमा प्रबंधन से मरीजों के उपचार परिणाम बेहतर होते हैं और रोकी जा सकने वाली मौतों में कमी लाई जा सकती है. नोडल पदाधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने आपातकालीन और गंभीर चिकित्सा सेवाओं में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण को आवश्यक बताया. संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्देय कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों के मामलों में समय पर वैज्ञानिक उपचार जीवनरक्षक साबित होता है. वहीं, उप-निदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि “गोल्डन ऑवर” के दौरान सही उपचार मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है.

विशेषज्ञ चिकित्सकों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में डॉ. ऋतु सिंह सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय योगदान दिया. प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने संस्थान की उत्कृष्ट ट्रॉमा केयर शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत किया.

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