Patna News: (नितिश सिंह की रिपोर्ट) इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में करीब 35 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला सामने आया है. आरोप है कि योजना के तहत आने वाले मरीजों का इलाज कैश बेसिस पर कर उनसे वसूली गई राशि का दुरुपयोग किया गया.
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने दर्ज कराया केस
मामला उजागर होने के बाद IGIMS के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन ने शास्त्रीनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के आधार पर चार आउटसोर्सिंग कर्मियों, अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
मरीज की शिकायत से हुआ खुलासा
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज ने शिकायत की कि वह आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आता था, लेकिन उससे कैश पेमेंट लिया गया. शिकायत के बाद संस्थान ने जांच समिति गठित की, जिसकी अंतरिम रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई.
जांच में गंभीर अनियमितताओं के आरोप
प्रशासनिक शिकायत में कहा गया है कि जांच में निम्नलिखित गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं.
- मरीजों के दावों का फर्जी तरीके से निर्माण
- बढ़ा-चढ़ाकर मेडिकल बिल तैयार करना
- जाली दस्तावेजों का उपयोग
- आयुष्मान भारत योजना की जगह कैश बेसिस पर इलाज कर धन हड़पना
- सार्वजनिक धन की अनधिकृत निकासी
- अस्पताल और लाभार्थी रिकॉर्ड में हेराफेरी
कार्रवाई और जांच जारी
IGIMS प्रशासन ने चारों आरोपित कर्मियों को तत्काल प्रभाव से काम से हटा दिया है. आउटसोर्सिंग कंपनी ने भी कथित रूप से वसूली गई राशि संस्थान को वापस कर दी है. फिलहाल शास्त्रीनगर पुलिस मामले की जांच कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अलग से जांच करेगी.
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