Patna NEET student death case : NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले की जांच में तेजी आ रही है. आज मंगलवार को इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT की टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची. जहां प्रभात खबर की टीम मौजूद थी. इस दौरान पूरी घटना में कई सवाल खड़े हो रहे है. छात्रा की हत्या में नए मोड़ आने की संभावना भी दिखाई दे रही है. हालांकि पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है लेकिन इस मामले में क्या नया ट्वीस्ट है जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें.
ऐसे की शंभू गर्ल्स हॉस्टल में SIT ने जांच
बता दें कि शंभू हॉस्टल में घुसकर पुलिस ने जांच की. पुलिस के साथ SIT भी थी. इस टीम के साथ सचिवालय एसडीपीओ अनु कुमारी भी मौजूद थीं. हालांकि, इस पूरी जांच ने स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल खड़े किए. दरअसल, वहां हुआ ये कि अचान पुलिस और एसआईटी शंभू हॉस्टल पहुंची. मगर, बाहर से ही महज 2 से 3 मिनट रुक कर अचानक वापस हो गई. इस के बाद दस मिनट बाद सिविल ड्रेस में आई एक अधिकारी के साथ शंभू हॉस्टल का फाटक खोला गया. इसके बाद टीम अंदर दाखिल हुई. टीम ने यहां करीब 15 मिनट बिताए.
मनीष के अलावा किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी
एसआईटी का आना, चाभी से शंभू हॉस्टल का दरवाजा खोलना और अंदर करीब 15 में जांच की प्रक्रिया पूरी करना. यह सब इतना अचानक हुआ कि मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह थे. बताया जा रहा है मनीष रंजन की पत्नी शंभू हॉस्टल के अंदर ही है. जिससे पूछताछ के लिए पुलिस और एसआईटी पहुंची थी. ये मनीष रंजन वही शख्स है जो इस हॉस्टल की बिल्डिंग का मालिक है. छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस अधिकारियों की ओर से प्रभात खबर डॉट को यह बताया गया कि मनीष रंजन को छोड़कर इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
कहानी में आ सकता है बड़ा ट्विस्ट
इस मामले में अब तक तीन बार SIT शंभू गर्ल्स हॉस्टल आ चुकी है. इसके अलावा प्रभात मेमोरियल अस्पताल भी जा चुकी है. इससे जांच का दायरा बढ़ गया है. केस में विवादित एंगल भी सामने आया है. ऐसा कहा जा रहा है कि है कि छात्रा का अपने परिवार के भीतर ही किसी बात को लेकर तनाव था. संभव है इसी विवाद की वजह से उसने गंभीर कदम उठाया हो. हालांकि इस मामले में अभी पुलिस और एसआईटी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. लेकिन शुरुआती तथ्य कुछ ऐसा इशारा जरूर कर रहे हैं. परिजन इसे हत्या बता रहे हैं और हॉस्टल संचालक पर सीधे आरोप लगा रहे हैं.
इसलिए जल्दबाजी से बच रही पुलिस
पुलिस फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचने से बच रही है. वजह साफ है, पहले की गई जल्दबाजी की वजह से पुलिस को फजिहत झेल रही है. जिस दिन छात्रा की मौत हुई थी, परिजन शव का अंतिम संस्कार करने जा रहे थे. तभी परिजनों को सूचना मिली कि छात्रा के साथ गलत हुआ है. इसके बाद शव को वापस लाया गया और गांधी मैदान कारगिल चौक पर हंगामा हुआ. उस वक्त सदर पटना के एएसपी अभिनव कुमार ने छात्रा की मौत को नॉर्मल और आत्महत्या बताया था. यह भी बताया गया कि लड़की ने नींद की दवा का अधिक डोज लिया है. बाद में आई Postmortem रिपोर्ट और CT Scan में कई चौंकाने वाले सवाल खड़े हुए. जिसके बाद पुलिस फूंक- फूंक कर कदम रख रही है.
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