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Patna NEET Girl Death Case : राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इंसाफ की मांग गूंज रही है. लेकिन, अब इस मामले में एक ऐसी ‘चिट्ठी बम’ फूटी है, जिसने पुलिस की पूरी थ्योरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है. छात्रा के पिता ने लड़की के पिता ने डीजीपी को चिट्ठी लिखी है. उन्होने कई सवाल उठाए हैं. जो ये साबित करते हैं कि यह मामला केवल हत्या या आत्महत्या का नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है.
मामला ड्रग ओवर नहीं!
परिजनों ने बिहार के डीजीपी (DGP) को लिख पत्र में SIT (विशेष जांच दल) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. लड़की के पिता ने इस पत्र में 8 ऐसे विस्फोटक प्वाइंट उठाए हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि यह मामला ‘ओवरडोज’ का भी नहीं है. DGP को लिखे पत्र में सबसे चौंकाने वाला खुलासा प्वाइंट वाइज किया है. पिता के सवालों में दम दिखाई देता है.
नर्स से क्यों कहा- लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है!
पत्र के अनुसार, परिजनों ने डीजीपी को लिखे पत्र में पूछा है कि वो ‘नर्स’ कौन थी? और वो अभी कहां है? जिसने 7 जनवरी 2026 की रात 10:30 से 11:30 के बीच छात्रा की मां से कहा था- लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है. ऐसे में पिता ने ये गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा है कि आखिर नर्स ने लड़की की मां को ऐसा क्यों कहा?
इसी नर्स ने छात्रा को एंबुलेंस से उतारा था
परिजनों ने SIT पर सवाल उठाते हुए कहा ने अब तक इस नर्स या मेडिकल स्टाफ का बयान दर्ज नहीं किया गया है, ऐसा क्यों? परिजनों का कहना है कि ये वही नर्स है. जिसने छात्रा को एंबुलेंस से उतारा था. अब बड़ा सवाल यह है कि वह नर्स कौन थी? उसने ऐसा क्यों कहा? और SIT ने अब तक उस नर्स का बयान दर्ज क्यों नहीं किया?
हॉस्पिटल ने नहीं लौटाए कपड़े! सबूत मिटाने की हुई कोशिश?
पत्र के अनुसार नंबर 7 पर जो सवाल परिजनों ने उठाया है. वह भी काफी अहम है. पत्र के 7वें प्वाइंट पर परिजनों का कहना है कि घटना के वक्त छात्रा ने जो कपड़े पहने थे, वो कपड़े प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल ने परिजनों को नहीं लौटाए हैं. परिजनों ने पूछा है कि आखिर वो कपड़े कहां गए? ऐसे में सलाल उठता है कि क्या सबूत मिटाने की कोशिश की गई?
क्या मौत के बाद कहानी बदली गई?
इतना ही नहीं, पत्र के 8वां प्वाइंट पुलिस और डॉक्टरों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है. 9 जनवरी तक डॉ. अभिषेक (ICU ड्यूटी) कह रहे थे कि बच्ची को ‘वायरल मेनिन्जाइटिस’ और ‘सिर में रक्त के थक्के’ हैं और उसी का इलाज (Acyclovir दवा) चल रहा था. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि, फिर अचानक बच्ची की मौत की वजह ‘नींद की गोली’ या ‘ड्रग अब्यूज’ कैसे बन गई? क्या मौत के बाद कहानी बदलने की कोशिश की जा रही है?
थानेदार और मकान मालिक भी रडार पर
परिजनों ने साफ शब्दों में चित्रगुप्त नगर की थाना प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका को संदिग्ध बताया है. पत्र में मांग की गई है कि उनकी कॉल डिटेल्स (CDR) और कार्यशैली की जांच हो. इसके अलावा, छात्रावास के मालिक मनीष रंजन के पिछले दरवाजे के सीसीटीवी फुटेज और हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उनके बेटे के मोबाइल की जांच की मांग ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.
सवालों के घेरे में SIT
डीजीप को भेजे पत्र में साफ लिखा है कि SIT जानबूझकर इन संवेदनशील बिंदुओं को नजरअंदाज कर रही है. अब देखना यह होगा कि बिहार के डीजीपी इस पत्र पर क्या एक्शन लेते हैं. क्या उस ‘नर्स’ को खोजा जाएगा? क्या गायब कपड़ों का रहस्य खुलेगा? या फाइलों दबकर रह जाएगा मौत का वो राज जिसे जानना चाहता है बिहार?
