Patna News: मानसून के दौरान जलनिकासी व सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पटना नगर निगम उड़ाही करा रहा है. वार्ड स्तर पर उपलब्ध सफाई कर्मियों से छोटे खुले नाले, बॉक्स नाले, मैनहोल तथा कैचपिट की सफाई करवायी जा रही है. राजधानी में निगम के सभी छह अंचलों में करीब 53 हजार से अधिक मैनहोल हैं. इसमें करीब 38 हजार मैनहोल की सफाई पूरी कर ली गयी है. बाकी बचे मैनहोल की सफाई 15 मई तक कराने की डेडलाइन दी गई है. हाल ही में, समीक्षा बैठक में संतोषजनक रिपोर्ट नहीं मिलने से नगर आयुक्त की ओर से कार्यपालक पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया. हालांकि, वर्तमान में सफाई में तेजी लाई गयी है.
सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. मार्च माह में कांग्रेस मैदान के पास वार्ड 43 में एक मजदूर भीतर व एक बाहर दिखे. इसी तरह एएन कॉलेज, मीठापुर व अन्य जगहों पर मैनहोल के भीतर मजदूरों को उतारकर सफाई करायी जा रही है. अभी दीघा-गांधी मैदान मेन रोड पर दीघा इलाके में तीन से चार लोगों को मैनहोल में उतार सफाई कराया जा रहा है.
मैनहोल सफाई में सबसे पीछे पाटलिपुत्र व बांकीपुर अंचल
मैनहोल सफाई में सबसे पीछे पाटलिपुत्र अंचल है. यहां करीब 14 हजार 237 मैनहोल हैं. इनमें लगभग 58 फीसदी की सफाई हुई है. वहीं, बांकीपुर अंचल में भी 11 हजार 560 मैनहोल में करीब 58.4% काम पूरा हुआ है.कंकड़बाग अंचल में भी करीब 36 फीसदी काम बाकी है. जबकि, अजीमाबाद व पटना सिटी में काम अंतिम चरण में है. नूतन राजधानी अंचल में भी 6125 मैनहोल की सफाई पूरी कर ली गयी है.
सफाई के लिए अंचलों में सुपर सकर व मिनी जेटिंग मशीन
पटना नगर निगम के पास मैनहोल की सफाई के लिए सुपर सकर व मिनी जेटिंग मशीन उपलब्ध है. इसे सभी अंचलों को उपलब्ध कराया गया है. मैनहोल की सफाई में इसका उपयोग किया जाता है. लेकिन, कई बार पत्थर, कचरा, जानवर के अवशेष, कपड़े आदि भी निकलते हैं, जिसके चलते मशीन इसे साफ करने में असमर्थ हो जाती है. ऐसी जगहों पर वर्तमान में डेली बेसिस पर पैसे देकर कर्मियों से सफाई करायी जाती है.
मैनुअल स्कैवेंजिंग से मुक्त होने का दावा है कागजी
सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक पटना सौ फीसदी मैनुअल सफाई प्रथा से मुक्त घोषित किया गया है. सुप्रीम कोर्ट से भी मैनुअल सफाई पर रोक है. साथ ही, सीवर लाइन की सफाई के दौरान निकलने वाली जहरीली गैसों से पीएमसी कर्मियों की पहले मौत भी हो चुकी है. इसके बाद भी पटना में यह प्रथा जारी है. सफाई कर्मियों को बिना पीपीइ किट के मैनहोल में उतारने से हृदय रोग, त्वचा संक्रमण, सांस संबंधी सहित कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं.
बैंडिकूट रोबोट की परियोजना भी फेल
मैनुअल सफाई से मुक्त करने के लिए बैंडिकूट रोबोट मंगाया गया था. दावा था कि यह मकड़ीनुमा रोबोट गहरे सीवर के भीतर जाकर कचरा निकालेगा और इंसानों को इसके भीतर नहीं जाना पड़ेगा. लेकिन, न तो इस रोबोट का उपयोग हो रहा है, न ही इसकी संख्या बढ़ाई गयी है.
अंचल – मैनहोल – साफ किया गया
नूतन राजधानी – 8811 – 6125
बांकीपुर – 11560 – 6754
अजीमाबाद – 1217 – 1103
पटना सिटी – 357 – 308
कंकड़बाग – 17424 – 11203
पाटलिपुत्र – 14237 – 8258
