बिहटा से मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
Swami Sahajanand Saraswati: बिहटा क्रांतिकारी किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की 76वीं पुण्यतिथि पर राघवपुर स्थित श्री सीताराम आश्रम में संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विषय आजादी के आंदोलन में किसान सभा की भूमिका रहा. इसमें इतिहासकारों और किसान नेताओं ने विस्तार से विचार रखे.
स्वतंत्रता आंदोलन में किसान सभा का योगदान
वक्ताओं ने कहा कि किसान सभा ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी. 1927 में पटना पश्चिमी किसान सभा, 1929 में बिहार राज्य किसान सभा और 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना ने किसान आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई. असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में भी किसान सभा की सक्रिय भूमिका रही.
स्वामी सहजानंद सरस्वती का संघर्ष और विचारधारा
वक्ताओं ने बताया कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का संघर्ष केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ नहीं था, बल्कि जमींदारी प्रथा और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध भी था. उन्होंने किसानों को संगठित कर सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा आंदोलन खड़ा किया.
वर्तमान कृषि संकट और चुनौतियों पर चर्चा
संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान कृषि भूमि अधिग्रहण, कृषि नीतियों में बदलाव और किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत संगठन और व्यापक आंदोलन की आवश्यकता है.
किसान आंदोलन को मजबूत करने पर जोर
वक्ताओं ने कहा कि इतिहास से सीख लेकर किसानों को नए दौर में भी संगठित होकर संघर्ष करना होगा. तभी कृषि और किसान दोनों के हित सुरक्षित रह सकेंगे.
प्रमुख वक्ता और संचालन
कार्यक्रम में कैलाश चंद्र झा, जितेंद्र कुमार, उमेश सिंह, ज्ञानचंद्र भारद्वाज, रवींद्रनाथ राय सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे. संचालन गोपाल शर्मा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन सुधांशु कुमार ने किया.
दीक्षा फाउंडेशन की कला प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान दीक्षा फाउंडेशन के बच्चों द्वारा लगाई गई कला प्रदर्शनी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. इसमें मधुबनी पेंटिंग, जूट क्राफ्ट, क्लॉथ बैग, बांस उत्पाद, कैनवास पेंटिंग और अन्य हस्तशिल्प शामिल थे, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा.
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