Bihar News: बिहार में सरकारी ठेकों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बड़ा एक्शन लिया है. ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार कर जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है. यह कार्रवाई टेंडर में हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुई है. गिरफ्तारी के बाद उन्हें देर रात SVU के दफ्तर ले जाया गया. जहां उनसे पूछताछ की गई.
करोड़ों के गहने बरामद
बुधवार को छापेमारी के दौरान एसवीयू को 61 सेल डीड के कागजात, करीब सवा किलो सोना, चांदी, हीरे के जेवर और ढाई लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं. बरामद गहनों की कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है. एजेंसी अब रिशु श्री की अन्य संपत्तियों और निवेश की भी जांच कर रही है.
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई
सरकार ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है. एसवीयू की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी ठेकों में किस तरह गड़बड़ी की गई और किन-किन लोगों को इसका फायदा पहुंचाया गया. सूत्रों के मुताबिक रिशु श्री के कुछ बड़े अधिकारियों और आईएएस अफसरों से करीबी संबंध थे. जांच एजेंसियां अब इन कनेक्शनों की भी पड़ताल कर रही हैं.
आईएएस संजीव हंस भी जांच के घेरे में
एसवीयू ने 30 अप्रैल 2025 को रिशु श्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था. इस मामले में बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि सरकारी निविदाओं में हेरफेर कर अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया.
ईडी की जांच में भी मिला था करोड़ों का खजाना
इस मामले में इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कार्रवाई कर चुका है. नवंबर 2025 में ईडी ने रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस दौरान भी 51 लाख रुपये नकद, करोड़ों के सोने-चांदी के जेवर और सेल डीड के दस्तावेज मिले थे.
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिशु श्री और आईएएस संजीव हंस को आरोपी बनाया था. जांच एजेंसी का दावा है कि रिशु श्री ने कई बड़े अधिकारियों से संबंधों का फायदा उठाकर जल संसाधन, नगर विकास और भवन निर्माण विभागों में ठेके हासिल किए.
अफसरों को कमीशन और विदेश यात्राओं का आरोप
ईडी सूत्रों के अनुसार रिशु श्री पर अधिकारियों को कमीशन देने और उनके निजी खर्च उठाने के आरोप भी हैं. इतना ही नहीं, कुछ अधिकारियों की विदेश यात्राएं स्पॉन्सर करने की बात भी जांच में सामने आई है. जांच एजेंसियों का मानना है कि अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से टेंडर प्रक्रिया को पहले से सेट किया जाता था, ताकि खास कंपनियों को फायदा मिल सके.
डिजिटल रिकॉर्ड और लेन-देन की हो रही जांच
एसवीयू की टीम छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी योजनाओं में कितनी राशि का घोटाला हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल हैं. इस कार्रवाई के बाद बिहार में सरकारी ठेकों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है.
